नवजात बच्चों की खरीद फरोख्त के एक और अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दिल्ली पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तस्कर, बिचौलिए, खरीदार और अस्पताल संचालक से लेकर असली माता-पिता तक शामिल हैं। मध्य जिला पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से चार और बच्चों को सुरक्षित बरामद भी किया है।
16 दिन से 8 माह तक के बच्चे बरामद
- दिल्ली : रोहिणी से 16 दिन का नवजात
- उत्तराखंड : ऋषिकेश से एक माह का लड़का और हरिद्वार से आठ माह का लड़का
- यूपी : मथुरा से 13 माह का लड़का
बैंक खातों में लाखों का लेन-देन
पुलिस को बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़े कई लाख रुपये के बैंक लेन-देन का भी पता चला है। पुलिस बैंक खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के जरिए पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
एक राज्य से दूसरे राज्य में बेच रहे थे नवजात
- गिरोह विभिन्न राज्यों से नवजात बच्चों को लेकर उन्हें उन दंपतियों को ऊंची कीमत पर बेचता था, जिनकी संतान नहीं थी या जो बेटे की चाहत रखते थे
- आरोपी जैविक माता-पिता से संपर्क कर बच्चे की डिलीवरी तक की पूरी व्यवस्था करते थे। फिर जरूरतमंद दंपती को लाखों रुपये में बच्चा बेच देेते
- जांच में सामने आया कि एक जैविक मां से बच्ची लेकर उसे कोई भुगतान नहीं किया। इसके अलावा, गुजरात के दंपती से एक नवजात बच्चे को खरीदा गया। बाद में उसे हरियाणा के एक दंपती को कई गुना अधिक कीमत पर बेच दिया गया
संतान की चाह में गंदा खेल…गिरफ्तार आरोपियों की अलग-अलग भूमिका
- गुरुग्राम की महिला : बच्चों की खरीद-फरोख्त में बिचौलिया
- गुजरात का शंकर गमार : जैविक माता-पिता से बच्चों की व्यवस्था कराने का काम करता था
- साबरकांठा के कांतिभाई गमार और उनकी पत्नी : अपना नवजात बच्चा बेचा
- गरिमा जैन : हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल से बच्चा लिया। उसके ससुर सतीश जैन ने महिला डॉक्टर को आठ लाख दिए
- केतकी गुप्ता (ऋषिकेश) : चार लाख में बच्चा खरीदा
- सेवानिवृत्त शिक्षक राम प्रकाश निषाद : 2025 में एक लड़का खरीदा
- अमित प्रताप व आभा सिंह (हरिद्वार) : बेटे की चाहत में करीब पांच लाख देकर बच्चा खरीदा








