प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के दौरे पर हैं। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच ऑकलैंड में द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे।
क्यों खास है न्यूजीलैंड?
- न्यूजीलैंड दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है, जो ऑस्ट्रेलिया से करीब 1,600 किलोमीटर दूर है।
- वर्ल्डओमीटर के अनुसार, यहां की आबादी लगभग 52.9 लाख (5,291,072) है।
- यह दुनिया के सबसे विकसित देशों में शामिल है और बेहतर जीवन स्तर, पारदर्शी शासन, मानव विकास व नागरिक स्वतंत्रता के लिए जाना जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, 2026 में न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था (GDP) लगभग 278.64 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि आर्थिक वृद्धि दर 2.1% रहने की उम्मीद है।
एफटीए से क्या फायदा होगा?
- इस समझौते के तहत भारत के 100% निर्यात पर आयात शुल्क खत्म हो जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद न्यूजीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
- न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
- एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी पार्टनरशिप के तहत दोनों देश कृषि क्षेत्र में सहयोग करेंगे, जिससे किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और उन्हें वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ने में मदद मिलेगी।
- इस समझौते से एमएसएमई और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। वस्त्र, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड जैसे श्रम-आधारित उद्योगों को जीरो-ड्यूटी एक्सेस का फायदा मिलेगा।
- भारत ने न्यूजीलैंड के लिए 70.03% टैरिफ लाइनों पर बाजार खोलने की पेशकश की है, जबकि 29.97% टैरिफ लाइनों को समझौते से बाहर रखा गया है। यह हिस्सा न्यूजीलैंड के भारत के साथ होने वाले लगभग 95% द्विपक्षीय व्यापार को कवर करता है।
- भारत ने कुछ संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है। इनमें डेयरी उत्पाद (दूध, क्रीम, पनीर, दही आदि), अधिकांश पशु उत्पाद, प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम जैसे कृषि उत्पाद, चीनी, कृत्रिम शहद, वनस्पति व पशु तेल, हथियार एवं गोला-बारूद, तांबा, एल्युमीनियम और उनसे बने कई उत्पाद शामिल हैं।
- करीब 30% टैरिफ लाइनों पर समझौते के लागू होते ही शुल्क पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इसमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस और कच्चा चमड़ा जैसे उत्पाद शामिल हैं।
- 35.60% टैरिफ लाइनों पर शुल्क 3, 5, 7 और 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। इनमें पेट्रोलियम ऑयल, माल्ट एक्सट्रैक्ट, वनस्पति तेल, कुछ इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल मशीनरी तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।
- लगभग 4.37% उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह खत्म नहीं होगा, बल्कि उसमें कमी की जाएगी। इसमें वाइन, दवाइयां, पॉलिमर, एल्युमीनियम तथा लोहा-इस्पात से जुड़े कुछ उत्पाद शामिल हैं।
- वहीं 0.06% उत्पादों पर टैरिफ रेट कोटा लागू होगा। इसमें मानुका शहद, सेब, कीवी फल और मिल्क एल्ब्यूमिन सहित कुछ विशेष उत्पाद शामिल हैं।
यह दौरा क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
करीब 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देश व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर लगातार काम कर रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत हुए हैं, मुक्त व्यापार समझौता हुआ है और लोगों के बीच संपर्क भी बढ़ा है।
पीएम मोदी के ऑकलैंड पहुंचने से एक दिन पहले न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि भारत को होने वाले न्यूजीलैंड के 57% निर्यात पहले ही दिन से शुल्क मुक्त हो जाएंगे। उन्होंने इस व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के साथ हुए इस व्यापार समझौते से न्यूजीलैंड के कारोबार को बड़ी बढ़त मिलेगी।







