West Asia- होर्मुज तनाव के बीच भारत के कच्चे तेल आयात पर फिलहाल असर नहीं, LPG-LNG पर कितना जोखिम?

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होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव के बावजूद भारत के कच्चे तेल के आयात पर फिलहाल बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि, अगर क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है तो एलपीजी और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और समुद्री परिवहन की लागत बढ़ सकती है।

ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली संस्था क्प्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, भारत ने हाल के कुछ वर्षों में कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। यही वजह है कि मौजूदा हालात में भारतीय रिफाइनरियों के लिए स्थिति सामान्य बनी हुई है। जून में भारत का कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया था। इसमें रूस से आयात सबसे ज्यादा रहा। रितोलिया ने कहा कि पिछले महीने जून में भारत ने रूस से करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो उसके कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा था। इससे रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। साथ ही सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से भी वैकल्पिक पाइपलाइन व अन्य मार्गों के जरिये तेल की आपूर्ति जारी है। पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से तेल खरीद ने भी भारत को आपूर्ति के कई विकल्प उपलब्ध कराए हैं।
माल भाड़ा व बीमा खर्च बढ़ने की आशंका
रितोलिया ने कहा कि जो तेल टैंकर सुरक्षित तरीके से होर्मुज से गुजर सकते हैं, उनकी आवाजाही जारी रहेगी। अगर तनाव लंबा खिंचता है तो जहाजों का माल भाड़ा और बीमा प्रीमियम बढ़ सकता है, जिससे आयात महंगा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों और कारोबारी जोखिमों के कारण ईरान से कच्चे तेल का आयात निकट भविष्य में भारत के लिए बड़ा विकल्प बनने की संभावना नहीं है।

एलपीजी व एलएनजी पर ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की तुलना में एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति अधिक जोखिम में है, क्योंकि इनके वैकल्पिक स्रोत सीमित हैं। अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इनकी उपलब्धता घट सकती है, माल भाड़ा बढ़ सकता है और क्षेत्रीय बाजार में कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

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