अयोध्या: अनुकल्प हो सकता है चढ़ावा चोरी का मास्टर माइंड, ऐसी पहुंचाई गई भाईयों और मित्रों तक चोरी की रकम

Spread the love

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब अनुकल्प मिश्रा की आर्थिक गतिविधियों पर केंद्रित हो गई है। सूत्रों के मुताबिक जांच में अब तक मिले तथ्यों के आधार पर अनुकल्प को चढ़ावा चोरी मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। उसकी संपत्तियों, खर्च और लेनदेन की जांच तेज की गई है।

 

सूत्रों के अनुसार मूलरूप से इनायतनगर क्षेत्र निवासी अनुकल्प मिश्रा वर्ष 2021-22 से मंदिर व्यवस्था से जुड़ा था। बीच में कुछ समय तक उसने काम छोड़ा और करीब दो वर्ष पहले फिर से जुड़ गया। जांच में उसके पास दो कार होने की जानकारी मिली है, जिनमें एक नई कार पिछले वर्ष खरीदी गई थी। इसमें गत वर्ष खरीदी गई कार की फोटो उसने सोशल मीडिया पर भी साझा किया था।

वहीं, अनुकल्प के घर आयोजित कथा में महिलाओं को वितरित करने के लिए खरीदी गई साड़ी भी जांच में शामिल है। सूत्रों के अनुसार अनुकल्प ने इसे कुमारगंज के एक व्यापारी से खरीदी थीं। इस संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है कि खरीद का भुगतान किस स्रोत से किया गया।

 

अभिषेक ने भाई से पूछा था पैसों का स्रोत
सूत्रों के अनुसार आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अभिषेक ने एक बार अनुकल्प से पैसों के स्रोत के बारे में सवाल किया था। बताया जाता है कि अनुकल्प ने उस समय गोलमोल जवाब दिया और इस विषय में आगे बात न करने की चेतावनी भी दी थी।

अनुकल्प के पिता से भी हुई पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने शुक्रवार को ही अनुकल्प के पिता से भी पूछताछ की है। इस दौरान परिवार से जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारियां एकत्र की जा रही हैं। जांच एजेंसियां अब आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, वाहन खरीद, महंगे सामान और अन्य वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड जुटा रही हैं।

9 लाख का और खुलासा, भाइयों-मित्रों तक अविनाश ने पहुंचाई रकम

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस रिमांड पर लिए गए आरोपी अविनाश शुक्ला ने 19 लाख रुपये का और खुलासा किया है। सूत्रों के अनुसार इस रकम का बड़ा हिस्सा परिजनों, मित्रों और खरीदारी पर खर्च किया गया है। अब पुलिस अलग-अलग लोगों तक पहुंची इस रकम की रिकवरी की प्रक्रिया में जुट गई है।

और पढ़े  राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय का बयान दर्ज,डॉ. अनिल मिश्रा समेत 80 अन्य को नोटिस

राम मंदिर की दान पेटिकाओं से चढ़ावा चोरी के मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस ने 13 घंटे की कस्टडी रिमांड पर बाहर निकाला था। इस दौरान रिजर्व पुलिस लाइंस परिसर में उससे लंबी पूछताछ हुई। इस दौरान उसने लगभग 19 लाख रुपयों का और खुलासा किया है। सूत्रों के मुताबिक अविनाश ने अपने एक भाई की शादी के दौरान करीब छह लाख रुपये दिए थे।

एक अन्य भाई को भी पांच से छह लाख रुपये देने की जानकारी मिली है। करीब साढ़े तीन लाख रुपये की एक कार खरीदी थी, जिसे पुलिस शुक्रवार को ही बरामद कर चुकी है। इसके अलावा एक मित्र को भी करीब ढाई लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इसी मित्र को महंगी मोबाइल फोन गिफ्ट करने की जानकारी भी मिली है। इसके अलावा अन्य लोगों को भी छोटी-मोटी रकम देने की जानकारी पूछताछ में सामने आई है। (संवाद)

भाइयों और मित्रों से भी पूछताछ
वहीं, पुलिस ने शुक्रवार को रिमांड के दौरान अविनाश के दो भाइयों से भी पूछताछ की। कई दस्तावेज और अन्य कागजात कब्जे में लिए गए हैं। अभिषेक के नाम से वर्ष 2024 में खरीदी गई जमीन के संबंध में पूछताछ हुई है। जिन खातों में धनराशि ट्रांसफर हुई, उनकी भी जांच की जा रही है। साथ ही जगह-जगह ट्रांसफर की गई धनराशि की बरामदगी के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

अन्य आरोपियों की रिमांड की तैयारी
सूत्रों के अनुसार पुलिस जल्द ही अनुकल्प मिश्रा, लवकुश, करुणेश और रमाशंकर मिश्रा समेत अन्य आरोपियों की भी कस्टडी रिमांड मांग सकती है। पूछताछ के जरिये पूरे नेटवर्क और चोरी की रकम के बंटवारे की जानकारी जुटाई जाएगी। जांच एजेंसियों का मानना है कि अलग-अलग रिमांड के जरिये बड़ी मात्रा में धनराशि की रिकवरी कराई जा सकती है। इसके लिए भी कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

और पढ़े  शाहजहाँपुर- ईदगाह कमेटी ने जगद्गुरु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रयासों का किया समर्थन, गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की भी अपील

विहिप में महासचिव पद को लेकर मंथन तेज

राम मंदिर से जुड़े घटनाक्रमों के बीच अब विश्व हिंदू परिषद के महासचिव पद को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर संगठन के भीतर लॉबी को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इनमें यह भी कहा जा रहा है कि संघ की कथित मराठा लॉबी संगठन और राम मंदिर ट्रस्ट में अपनी भूमिका मजबूत करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद घटनाक्रमों ने नया मोड़ लिया और इसके बाद संगठन के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गईं। पोस्टों में यह भी कहा जा रहा है कि महासचिव पद को लेकर लंबे समय से अंदरूनी खींचतान चल रही है।

इन चर्चाओं में वर्तमान महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, अनिल मिश्रा, मिलिंद परांडे, विनायक राव देशपांडे तथा सुनील आंबेकर के नाम भी लिए जा रहे हैं। कुछ पोस्टों में यह भी दावा किया गया है कि महासचिव पद के लिए नए चेहरे की तलाश की जा रही है तथा पूर्व सरकार्यवाह सुरेश ”भैय्याजी” जोशी का नाम भी चर्चा में है। हालांकि इस संबंध में न तो विहिप, न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और न ही संबंधित पदाधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।

सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री में कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं, जिनमें कथित दबाव, इस्तीफे और संगठनात्मक हस्तक्षेप जैसी बातें शामिल हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से भी इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

और पढ़े  प्रयागराज पहुंचे अखिलेश दिखाए गए काले झंडे, गो बैक के लगाए गए नारे, सपाइयों ने पीटा

आरोपियों ने बना रखे थे गुट, बंटवारे का भी था अलग तरीका

 राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में आरोपियों की कार्यप्रणाली को लेकर एक और खुलासा सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे की रकम की हेराफेरी करने वाले आरोपियों ने आपस में अलग-अलग गुट बना रखे थे। दोनों गुटों का काम करने का तरीका भी अलग था।

चढ़ावा चोरी मामले में राम मंदिर के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की तहरीर पर गणना कार्य में लगे छह लोगों, पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहे सुभाष श्रीवास्तव और चंपत राय के चालक रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। मामले में पुलिस की अलग-अलग टीम जांच कर रही है। जांच सूत्रों के अनुसार गणना कार्य में शामिल मुख्य रूप से छह लोगों ने अपने अलग-अलग गुट बनाए थे।

पहला गुट अनुकल्प, अविनाश शुक्ला और लवकुश मिश्रा का था। यह तीनों चोरी की गई रकम का बंटवारा 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर भीखापुर के पास स्थित एक बाग में बैठकर करते थे। यहीं पर हिसाब-किताब तय होता था और सभी अपने-अपने हिस्से की रकम लेकर अलग हो जाते थे। यहीं से आगे की रणनीति और अन्य क्रियाकलापों पर भी चर्चा होती थी।

वहीं, दूसरा गुट अलग तरीके से काम करता था। इस गुट के सदस्य किसी बैठक या सामूहिक बंटवारे में शामिल नहीं होते थे, बल्कि चोरी की गई रकम में अपने-अपने हिस्से की धनराशि सीधे निकाल लेते थे। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि दोनों गुटों के बीच आपसी तालमेल किस स्तर तक था और क्या पूरी साजिश किसी एक मास्टरमाइंड के इशारे पर संचालित हो रही थी। सूत्रों के अनुसार आरोपियों से पूछताछ और अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल रही है। जिन स्थानों पर रकम के बंटवारे की बात सामने आई है, वहां के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।


Spread the love
  • Related Posts

    वर्दी की बर्बरता: वारंटी समझ गलत युवक को उठाया, बेरहमी से पीटकर किया अधमरा, कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा मामला

    Spread the love

    Spread the loveहमीरपुर जिले में सदर कोतवाली पुलिस गलत वारंटी समझकर मेरापुर निवासी शिवराज सिंह को थाने ले आई। पीड़ित के परिजन का आरोप है कि थाने के भीतर उसे…


    Spread the love

    नोएडा के सेक्टर-18 की मल्टीलेवल पार्किंग में मिला महिला का शव, अभी पहचान नहीं

    Spread the love

    Spread the love नोएडा के सेक्टर-20 थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेक्टर-18 की मल्टीलेवल पार्किंग में एक अज्ञात महिला का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है।…


    Spread the love