एसआईटी दो दिवसीय दूसरे चरण की जांच पूरी कर शुक्रवार रात लखनऊ लौट गई। टीम ट्रस्ट के गठन से अब तक के करीब पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, लेनदेन और ऑडिट दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान ट्रस्ट के सभी प्रमुख वित्तीय दस्तावेज अपने कब्जे में लिए गए हैं। शुरुआती जांच में ऑडिट और वित्तीय लेनदेन में कई खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार, दान की राशि में कथित हेरफेर गिनती के दौरान ही किए जाने की आशंका है, जिससे वास्तविक दान राशि और संभावित गबन का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सीए भी सवालों के जवाब में उलझे
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने ट्रस्ट से जुड़े तीनों सीए से भी पूछताछ की है। उन्होंने किस तरह से ऑडिट किया है, वह पूरी प्रक्रिया समझी है। सभी दस्तावेज भी लिए हैं। एसआईटी के कई ऐसे सवाल थे, जिनके जवाब सीए नहीं दे सके। एसआईटी दोबारा इन सभी से पूछताछ कर सकती है। एसआईटी ने चार से पांच और लोगों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया है, जो अनिल मिश्रा व चंपत राय के करीबी हैं।
जमीन खरीद-फरोख्त की जड़ें गहरी
एसआईटी ने जब से तफ्तीश करनी शुरू की है, तब से मंदिर से जुड़ी खरीदी गई जमीनों को लेकर कई मामले सामने आए हैं, जिनमें आरोप है कि जमीन की खरीद में कई तरह की गड़बड़ियां की गई हैं। एसआईटी ने कई लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। दस्तावेज भी कब्जे में लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जमीन की खरीद-फरोख्त की जड़ें बहुत गहरी हैं। इसलिए एसआईटी इसकी विस्तृत जांच न करके मिले सुबूतों को शासन को सौंपेगी। बाकी ऑडिट संबंधी जांच की रिपोर्ट तैयार करेगी।
कड़ियां जोड़ रही पुलिस…
पुलिस आठ आरोपियों को जेल भेजने के बाद की विवेचना में कड़ियां जोड़ने में जुटी है। आरोपियों के संपर्क में रहने वाले आठ लोगों को चिह्नित किया है। इसमें कुछ बैंक कर्मी व गणनाकर्मी भी हैं। इन सभी का कनेक्शन आरोपियों से मिला है। अंदेशा है कि ये भी चोरी के खेल में शामिल थे। सुबूत जुटाने के बाद पुलिस इनको आरोपी बनाकर गिरफ्तार करेगी। वहीं, जेल में बंद कई और आरोपियों को भी रिमांड पर लेकर पुलिस पूछताछ कर सकती है।