मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अपने अनशन के 17वें दिन बेहद भावुक अपील की। पाटिल ने बताया कि उन्होंने सलाइन और अन्य चिकित्सा सहायता लेना बंद कर दिया है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मुंबई की उनकी आगामी यात्रा महाराष्ट्र के लोगों के साथ उनकी आखिरी मुलाकात भी हो सकती है।
उन्होंने मराठा समाज से संघर्ष जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि समुदाय को किसी भी हाल में हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा शरीर जहां गिरे, गिर जाए, लेकिन मराठा समाज इतनी मजबूती से लड़ाई लड़े कि आने वाली पीढ़ियां गर्व से कहें कि वह मर गया, लेकिन झुका नहीं। मैं यूं ही मरना नहीं चाहता, बल्कि अपने समाज को उसका अधिकार दिलाते हुए मरना चाहता हूं। समाज की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आनी चाहिए।
जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन को कमजोर करने के लिए राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है। समुदाय को सरकार की हर चाल का जवाब देना होगा। मराठा आंदोलन को बदनाम करने और उसे दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन समाज को संगठित रहना चाहिए।
मराठा समाज के नेतृत्व पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मराठा समाज में नेतृत्व की कोई कमी नहीं है। यदि एक नेता नहीं रहेगा तो दूसरा सामने आएगा। उन्होंने समाज से अपील की कि वे उसी व्यक्ति या दल का समर्थन करें जो आरक्षण दिलाने में मदद करे। केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद से समाज का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। जरांगे पाटिल ने दावा किया कि 5.5 करोड़ मेहनतकश मराठा किसी भी समय मुंबई को रोक सकते हैं, जबकि राजनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली वर्ग आबादी का एक छोटा हिस्सा है।
उपचार लेने से क्यों किया इनकार?
उन्होंने बताया कि सरकार और समाज की अपील पर उन्होंने कुछ समय के लिए चिकित्सा सहायता स्वीकार की थी, लेकिन मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के कारण दोबारा इलाज लेने से इनकार कर दिया। पिछले सात-आठ दिनों तक सलाइन की वजह से उनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य बना हुआ था, लेकिन अब सलाइन और पानी बंद करने के बाद शरीर में तेजी से बदलाव हो रहे हैं।
उन्होंने समर्थकों से यह भी अपील की कि वे अभी उनसे मिलने के लिए पैसे खर्च न करें। इसके बजाय अंतिम और बड़े मुंबई मार्च के लिए धन और वाहनों की व्यवस्था बचाकर रखें।





