नवजात बच्चों का सौदा करने में प्रतिभा अहम भूमिका अदा करती थी। हीरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल के अलावा दिल्ली-एनसीआर के कई आईवीएफ सेंटर और अस्पतालों से इसके संपर्क थे। प्रतिभा ऐसे दंपती की तलाश करती थी, जिनके यहां बच्चे पैदा नहीं हो पा रहे थे। इसके अलावा ऐसे परिवारों की तलाश की जाती थी, जिनके यहां बेटी ही है। अस्पताल के जरिए ऐसे परिवारों तक पहुंच बनाने के उनको 3-4 दिन का नवजात बच्चा, वह भी पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत देने का दावा कर तैयार कर लिया जाता था। बदले में 8 से 10 लाख रुपये तक की रकम को वसूल लिया जाता था।
गुजरात और राजस्थान से नवजात को लाने की जिम्मेदारी ज्योति, शालू, ललित और विपिन की थी। बच्चा लाने के बाद उसको हीरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल में रख दिया जाता था। इसके बाद खरीदार दंपती को अस्पताल बुलाकर बच्चे और परिवार के जन्म से लेकर बाकी फर्जी कागजात तैयार कर बच्चे को दंपती को सौंप दिया जाता था। शुरुआती पूछताछ में आरोपी 30 बच्चे बेचने की बात कर रहे हैं लेकिन पुलिस आशंका जता रही है कि इन लोगों ने ज्यादा बच्चों का सौदा करवाया है।








