बच्चों का सौदा: 8-10 लाख में बिकते थे मासूम, गुजरात-राजस्थान से लाए जाते, अहम भूमिका अदा करती थी प्रतिभा

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नवजात बच्चों का सौदा करने में प्रतिभा अहम भूमिका अदा करती थी। हीरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल के अलावा दिल्ली-एनसीआर के कई आईवीएफ सेंटर और अस्पतालों से इसके संपर्क थे। प्रतिभा ऐसे दंपती की तलाश करती थी, जिनके यहां बच्चे पैदा नहीं हो पा रहे थे। इसके अलावा ऐसे परिवारों की तलाश की जाती थी, जिनके यहां बेटी ही है। अस्पताल के जरिए ऐसे परिवारों तक पहुंच बनाने के उनको 3-4 दिन का नवजात बच्चा, वह भी पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत देने का दावा कर तैयार कर लिया जाता था। बदले में 8 से 10 लाख रुपये तक की रकम को वसूल लिया जाता था।

 

गुजरात और राजस्थान से नवजात को लाने की जिम्मेदारी ज्योति, शालू, ललित और विपिन की थी। बच्चा लाने के बाद उसको हीरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल में रख दिया जाता था। इसके बाद खरीदार दंपती को अस्पताल बुलाकर बच्चे और परिवार के जन्म से लेकर बाकी फर्जी कागजात तैयार कर बच्चे को दंपती को सौंप दिया जाता था। शुरुआती पूछताछ में आरोपी 30 बच्चे बेचने की बात कर रहे हैं लेकिन पुलिस आशंका जता रही है कि इन लोगों ने ज्यादा बच्चों का सौदा करवाया है।

मध्य जिला के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि प्रतिभा के खिलाफ वर्ष 2023 में आईजीआई एयरपोर्ट थाने में नवजात बच्चों का सौदा करने का मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले में प्रतिभा की करीबी ओमवती भी शामिल थी।

गुरुग्राम में मेड की नौकरी करने वाली ओमवती भी बच्चों के खरीदारों की तलाश करती थी। पूछताछ में साएबा भाई घमर ने बताया कि ज्यादातर लोगों की मांग लड़के की होती थी। इसलिए वह राजस्थान और गुजरात के परिवारों से सिर्फ लड़के खरीदने की बात करते थे। साएबा भाई ने बताया कि उसने 99 फीसदी लड़कों का ही सौदा करवाया है।

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ऑन डिमांड होता था बच्चों का इंतजाम  
साएबा भाई ने बताया कि दिल्ली से ऑन डिमांड बच्चे उपलब्ध करवाए जाते थे। दिल्ली से इशारा मिलने के बाद वह बच्चे को खरीद लेता था। बच्चा लेने से एक दिन पहले वह ज्योति और ललित को सूचना दे देता था। कार चालक विपिन को लेकर ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित बच्चा लेने गुजरात या राजस्थान पहुंच जाते थे। बच्चा लेकर या तो यह सीधे हीरा अस्पताल पहुंचते थे या ज्योति उसे पहाड़गंज लेकर आ जाती थी। इसके बाद बच्चे को अगले दिन अस्पताल पहुंचाया जाता था। ज्योति का परिवार तिलक नगर, दिल्ली, शालू का परिवार टैगोर गार्डन, दिल्ली, ललित लक्ष्मी नगर, प्रतिभा गोयला विहार, विपिन कुतुब विहार में रहते हैं। वहीं ओमवती गुरुग्राम में रहती है। वहीं डॉ. विवेकी का परिवार रोहिणी में रहता है। डॉक्टर न होने के बाद भी वह बड़ा अस्पताल चला रही थी। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के लिए वह मेडिकल काउंसिल को लिखेंगे ताकि लाइसेंस को रद्द कराया जा सके।

पुलिस ने बच्चा तस्कर गिरोह पकड़ा
पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर दिल्ली के निजी अस्पताल की संचालिका समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से पांच नवजातों को बरामद कर आश्रय गृह भेजा गया है। जांच में सामने आया कि गिरोह डेढ़ साल में विभिन्न राज्यों में 30 बच्चों को बेच चुका है। आरोपी राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों को लालच देकर महज 10 से 15 हजार रुपये में उनके बच्चे खरीद कर बेऔलाद दंपतियों को 8 से 10 लाख रुपये में बेचते थे। गिरोह के तार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से जुड़े हैं।

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पुलिस ने नकली ग्राहक बनाकर भेजा
दिल्ली मध्य जिला के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में पहाड़गंज से सूचना मिली थी कि एक महिला अलग-अलग बच्चों के साथ दिख रही है। पुलिस ने नकली ग्राहक बनाकर महिला के पास भेजा। सौदा तय होने और 20 हजार रुपये की टोकन मनी देने के बाद पांच जून को जैसे ही आरोपियों ने नकली ग्राहक को 4-5 दिन का नवजात सौंपा, पुलिस ने ज्योति उर्फ कमलेश को दबोच लिया। उसी दिन उसकी साथी शालू और ललित को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि गिरोह के तार बेगमपुर, रोहिणी स्थित हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़े हैं। इसके बाद पुलिस ने छापा मारकर अस्पताल की संचालिका डॉ. विवेकी (47) को भी गिरफ्तार कर लिया।

पानीपत से तीन और ग्वालियर से दो खरीदार दबोचे…
गिरफ्तार आरोपियों में ओमवती (45) और बच्चे खरीदने वाले पांच लोग शामिल हैं। पुलिस ने ग्वालियर में छापा मारकर मुकेश और रीमा पाल को गिरफ्तार किया, जिन्होंने 9 लाख रुपये में एक लड़का और लड़की खरीदे थे। पानीपत से सन्नी अरोड़ा, रितु अरोड़ा और सारिका को गिरफ्तार किया है। अन्य आरोपियों की तलाश में राजस्थान और मध्य प्रदेश में छापे मारे जा रहे हैं। पुलिस ने बेचे गए दो और नवजातों का पाली और मध्य प्रदेश में पता लगाया है, जहां टीम भेजी गई है।

गुजरात और पाली से बच्चों को लाया जाता था दिल्ली

  • गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर बच्चों का सौदा कराने वाली लैब टेक्निशियन प्रतिभा (34) और कार चालक विपिन (33) को भी दबोचा गया।
  • गिरोह की मास्टरमाइंड डॉ. विवेकी और राजस्थान के उदयपुर निवासी साएबा भाई घमर उर्फ कालिया है। साएबा गुजरात और पाली से बच्चों का इंतजाम करता था, जिन्हें विपिन कार से दिल्ली लाता था।
  • अस्पताल में ही बच्चों के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और दूसरे कागजात बनवाए जाते थे। गिरोह लड़कियों को 4 से 5 लाख और लड़कों को 8 से 10 लाख रुपये में बेचता था।
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जैविक माता-पिता को सौंपे जाएंगे
बरामद पांच नवजातों में संभवत: चार आदिवासी हैं, जबकि एक दिल्ली का है। बच्चों की उम्र 27 दिन से लेकर चार महीने तक है। पुलिस के अनुसार, इन बच्चों के असली माता-पिता की खोज जारी है। जैविक माता-पिता की पहचान के बाद नवजात उन्हें सौंप दिए जाएंगे। पुलिस ने तस्कर गिरोह से 2.92 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इस राशि से गिरोह एक नवजात को खरीदने वाला था।


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