Rajya Sabha-: नाम वापसी की अंतिम तारीख आज, कितने उम्मीदवार निर्विरोध होंगे निर्वाचित? जानें..

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राज्यसभा चुनाव के लिए आज नाम वापसी की अंतिम तारीख हैं। यानी उम्मीदवार आज अपना नाम वापस ले सकते हैं। इसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होगी। वहीं, आज कई उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की पूरी संभावना है। बता दें कि, राज्यसभा की 24 सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है। इस बार 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिनमें कुल 26 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन शामिल हैं।

 

कहां-कहा हो रहे चुनाव?
इसमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम शामिल हैं। आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में सबसे अधिक चार-चार सीटों पर चुनाव हो रहा है। वहीं, मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन सीटों, झारखंड में दो सीटों और मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में एक-एक सीट के लिए चुनाव हो रहा है।

राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश और झारखंड सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इन दोनों राज्यों में मुकाबला दिलचस्प हो गया है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से क्रॉस वोटिंग की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इन चुनावों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) राज्यसभा में अपने दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच सकता है।

झारखंड में क्या है स्थिति?
झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। इनके अलावा आंध्र प्रदेश से वर्तमान राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं। यहां जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 28 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी। भाजपा और उसके सहयोगियों के पास कुल 24 विधायक हैं। ऐसे में परिमल नथवानी को जीत के लिए कम से कम तीन अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। इसी वजह से यहां क्रॉस वोटिंग की संभावना पर चर्चा तेज है।

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मध्य प्रदेश में तीसरी सीट पर दिलचस्प मुकाबला
मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। भाजपा ने तीनों सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। पार्टी ने तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने पूर्व लोकसभा सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है। जिनका नामांकन रद्द होने के बाद से सियासत चरम पर है। मध्य प्रदेश की 228 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 58 वोट चाहिए। भाजपा आसानी से दो सीटें जीत सकती है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसके पास आवश्यक संख्या से 10 वोट कम हैं। दूसरी ओर कांग्रेस की प्रभावी संख्या भी कुछ कम हुई है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है। भाजपा को उम्मीद है कि वह अतिरिक्त समर्थन या संभावित क्रॉस वोटिंग के जरिए तीसरी सीट भी जीत सकती है।

गुजरात में भाजपा की क्लीन स्वीप की तैयारी
गुजरात की चार राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने राजूभाई शुक्ला, मुकेश राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र कंजारिया को उम्मीदवार बनाया है। 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 161 विधायक हैं और विपक्ष ने अभी तक कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। ऐसे में भाजपा के चारों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

आंध्र प्रदेश में एनडीए को बढ़त
आंध्र प्रदेश की चार सीटों के लिए तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने सना सतीश बाबू, बाश्यम रामकृष्ण और चिंतकायला विजय को उम्मीदवार बनाया है। वहीं जनसेना पार्टी की ओर से लिंगमनेनी रमेश मैदान में हैं। विधानसभा में एनडीए गठबंधन की मजबूत स्थिति के कारण इन उम्मीदवारों की जीत आसान मानी जा रही है।

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राजस्थान और कर्नाटक में भी चुनाव
राजस्थान की तीन सीटों में कांग्रेस ने नीरज डांगी को दोबारा उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को मैदान में उतारा है। कर्नाटक की चार सीटों के लिए कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा और मंसूर अली खान को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने एम. नागराजा को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने भाजपा पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा को राज्यसभा का टिकट नहीं देने का आरोप भी लगाया है।

अन्य राज्यों में क्या है स्थिति?
मणिपुर की एकमात्र सीट के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अधीकारिमयुम शारदा देवी ने नामांकन दाखिल किया है। अरुणाचल प्रदेश में भाजपा नेता ताई तागक, मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी के जेम्स के. संगमा और मिजोरम में सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट के के. लालत्लुआंगकिमा उम्मीदवार हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में राज्यसभा की एक-एक सीट पर उपचुनाव भी होगा। महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि तमिलनाडु में कांग्रेस ने प्रवीण चक्रवर्ती को मैदान में उतारा है।

ऐसे होता है राज्यसभा का चुनाव
अनुच्छेद 84 के तहत भारत का नागरिक होने के अलावा राज्यसभा की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष तय की गई, जबकि निचले सदन लोकसभा के लिए यह 25 वर्ष है। संविधान के अनुच्छेद 102 में दिवालिया और कुछ अन्य वर्ग के लोगों को राज्यसभा सदस्य बनने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 154 के अनुसार राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। हर 2 साल में इसके एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं इसलिए राज्यसभा कभी भंग नहीं होती।

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न्यूनतम 10  सदस्यों की सहमति आवश्यक
राज्य सभा में सदस्यों का चुनाव राज्य विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है जिसमें विधान परिषद् के सदस्य वोट नहीं डाल सकते। नामांकन फाइल करने के लिए न्यूनतम 10  सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है। सदस्यों का चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत के द्वारा निर्धारित कानून से होता है। इसके अनुसार राज्य की कुल विधानसभा सीटों को राज्यसभा की सदस्य संख्या में एक जोड़ कर उसे विभाजित किया जाता है फिर उसमें 1 जोड़ दिया जाता है।

इसे इस तरह समझें कि यूपी में कुल 403 विधायक हैं और 11 राज्यसभा सीट हैं जिन्हें 12 ( 11 + 1) से विभाजित करके फिर उसमे 1 जोड़ने पर 34 की संख्या आती है जो वहां चुनाव जीतने के लिए न्यूनतम वोटों की संख्या होगी। विधायक वरीयता के अनुसार अपना वोट देते हैं और पहली वरीयता के न्यूनतम वोट जिसे मिल जाते हैं वह व्यक्ति विजयी हो जाता है। इसके बाद यदि सदस्यों के लिए वोटिंग होती है तो सबसे कम वोट मिलने वाले उम्मीदवार के वोटों को दूसरी वरीयता के अनुसार अन्य उम्मीदवारों को ट्रांसफर कर दिया जाता है। यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक उम्मीदवार विजयी नहीं हो जाए। इसीलिए चुनाव होने की स्थिति में विधायकों द्वारा अन्य वरीयता के मतों का महत्व बहुत बढ़ जाता है।


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