एच 1बी- H-1B वीजा धारकों की बढ़ेंगी मुश्किलें?, ग्रीन कार्ड मिलना आसान नहीं,अमेरिकी संसद पेश हुआ ये प्रस्ताव

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मेरिका में एच-1बी वीजा को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसमें एच-1बी वीजा प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग की गई है। इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर पड़ सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय आईटी और तकनीकी क्षेत्र में इसी वीजा के जरिए अमेरिका जाते हैं। विधेयक में एच-1बी वीजा को ग्रीन कार्ड तक पहुंचने का रास्ता खत्म करने, वीजा अवधि घटाने और विदेशी छात्रों के लिए काम करने वाले ओपीटी कार्यक्रम को बंद करने जैसे बड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

 

एच-1बी वीजा को लेकर नया प्रस्ताव क्या है?

रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट नाम से यह विधेयक पेश किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब 40 वर्षों में एच-1बी वीजा प्रणाली का गलत इस्तेमाल हुआ है। उनके मुताबिक, अमेरिकी कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देकर अमेरिकी तकनीकी कर्मचारियों को पीछे कर रही हैं। इस विधेयक में कहा गया है कि अब वीजा प्रणाली को मेरिट यानी योग्यता और ज्यादा वेतन के आधार पर चलाया जाना चाहिए। अभी एच-1बी वीजा का आवंटन लॉटरी सिस्टम के जरिए होता है।

 

ग्रीन कार्ड और ओपीटी पर क्या असर पड़ेगा?

इस विधेयक का सबसे बड़ा प्रस्ताव यह है कि एच-1बी वीजा धारकों के लिए ग्रीन कार्ड का रास्ता लगभग बंद कर दिया जाए। अभी तक एच-1बी वीजा पर काम करने वाले लोग अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे। लेकिन नए प्रस्ताव में ड्यूल इंटेंट नीति खत्म करने की बात कही गई है। यानी वीजा धारक को यह साबित करना होगा कि वह अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का इरादा नहीं रखता। इसके अलावा विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद सीमित समय तक काम करने की अनुमति देने वाले ओपीटी कार्यक्रम को भी खत्म करने का प्रस्ताव है। इसका असर हजारों भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है।

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वीजा अवधि और फीस में क्या बदलाव होंगे?

प्रस्तावित कानून के तहत एच-1बी वीजा की अधिकतम अवधि छह साल से घटाकर सिर्फ दो साल करने की बात कही गई है। साथ ही अब लॉटरी सिस्टम की जगह ज्यादा वेतन देने वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी जा सकती है। ट्रंप प्रशासन पहले ही कानूनी माइग्रेशन कार्यक्रमों पर सख्ती बढ़ा चुका है। नई एच-1बी याचिकाओं पर एक लाख डॉलर तक की फीस लगाने और सख्त नियम लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं। इस विधेयक को अमेरिकी टेक वर्कर्स और इमिग्रेशन से जुड़े कुछ संगठनों का समर्थन भी मिला है।

 

भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर क्या असर होगा?

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां से सबसे ज्यादा लोग एच-1बी वीजा पर अमेरिका जाते हैं। आईटी, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले हजारों भारतीय पेशेवर और छात्र इस प्रणाली पर निर्भर हैं। अगर यह विधेयक आगे बढ़ता है तो भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका में नौकरी और स्थायी बसने का रास्ता मुश्किल हो सकता है। हालांकि यह अभी सिर्फ प्रस्तावित कानून है और इसे लागू होने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। फिर भी इस प्रस्ताव ने भारतीय छात्रों और आईटी सेक्टर में चिंता बढ़ा दी है।


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