देहरादून- देहरादून के नए DM किसे मानते हैं सबसे बड़ी चुनौती?बताई जनता दरबार का नाम बदलने की वजह

राज्य गठन के बाद से देहरादून में विकास हुआ है लेकिन नित नई समस्याएं भी जन्म लेती हैं। बढ़ती आबादी के सापेक्ष संसाधन उपलब्ध कराना हर किसी प्रशासनिक अधिकारी की प्राथमिकताओं में रहा है। कई ने जनता का विश्वास जीता तो कुछ अपनी प्रशासनिक क्षमताओं के आधार पर पहचाने गए।

जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर अब जिले की कमान डॉ. आशीष चौहान के हाथ में है। उनकी भी कई प्राथमिकताएं हैं तो कई चुनौतियों को भी वह मानते हैं। एक सप्ताह पहले पदभार संभालने के बाद उन्होंने जिले की जनता की नब्ज टटोलने का प्रयास भी शुरू कर दिया है।

 

जनता दरबार का नाम बदलने से लेकर भूमि विवादों में विशेष सेल के गठन ये हालिया उनके कुछ निर्णयों में शामिल हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान से इन्हीं चुनौतियों, संभावनाओं और प्राथमिकता पर अमर उजाला ने उनसे बात की। पेश हैं इस बातचीत के कुछ अंश…

आप देहरादून की सबसे बड़ी चुनौती किसे मानते हैं?

देहरादून आज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से महज ढाई घंटे की दूरी पर है। यहां की जनसंख्या भी लगातार बढ़ रही है। देहरादून को प्रकृति ने बहुत कुछ दिया है। इसी से देहरादून की एक पहचान है। इसमें एक ग्रीन कैपिटल बनने की पूरी संभावनाए हैं। यहीं से चुनौतियों की शुरुआत भी होती है। यहां की धारण क्षमताओं को भी ध्यान में रखना होगा। हमें विकास और यहां के लोगों को संसाधन उपलब्ध कराने के लिए इसका विकास कुछ इस तरह से करना होगा कि प्रकृति की इस देन में कोई छेड़छाड़ न हो। यहां के लोगों के साथ-साथ आने वाले पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं मिलें इसके लिए सतत विकास करने की आवश्यकता है।

 

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देहरादून की यातायात की समस्या में किस तरह सुधार हो सकता है?

शहर में यातायात जाम एक बड़ी समस्या है। इसके लिए एक विस्तृत कार्ययोजना बनाने की जरुरत है। इसमें जनता से आने वाले सुझावों को भी शामिल किया जाएगा। देहरादून शहर और ऋषिकेश में जगह की सबसे बड़ी समस्या है। ऐसे में यहां के लिए एक इंजीनियरिंग सोच के साथ सुधार किया जाएगा। बहुत से ऐसे बोटलनेक हैं जिनके बारे में पुलिस के साथ मिलकर काम किया जाएगा।

 

आपने जनता दरबार का नाम बदला है इसके पीछे कारण?

प्रशासनिक अमला जनता की सेवा के लिए होता है। हमें ध्यान रखना होगा कि जब कोई अपनी समस्या लेकर आता है तो उसकी अपेक्षा त्वरित समाधान की होती है। उन्हें एक ऐसा माहौल मिले जिससे वह अपनी बातों को विस्तार से कह सके और अधिकारी उन्हें सुन सके। जनता याची की तरह नहीं लगनी चाहिए। यही मेरी सोच है कि इसे अब समाधान दिवस के रूप में आयोजित किया जाए। इसी मौके पर लैंड फ्रॉड की समस्याओं को हल करने के लिए एक स्पेशल सेल गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। ताकि लोगों की शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जा सके।

 

प्राथमिकताओं में आप और किन-किन बातों को रखते हैं?

जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि जनता को सहूलियत मिले। इसके लिए पेयजल, ड्रेनेज सिस्टम, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोतरी पर फोकस रहेगा। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सीएमओ को निर्देश दिए गए हैं कि वह दूरस्थ क्षेत्रों की एक सूची तैयार करें जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं को आसानी से उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा शिक्षा में भी जो बच्चे कठिनाईयों से जूझकर स्कूल जाते हैं उन्हें भी चिह्नित किया जाए। ताकि इन क्षेत्रों में सुविधाओं का विकास तेजी से किया जा सके।

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देहरादून की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए क्या किया जा सकता है?

यहां की अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट और पर्यटन मुख्य रूप से शामिल हैं। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण हैं वे लोग जो बाहर से आकर यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम करते हैं। इसके लिए जरूरी है कि उन्हें एक ऐसा आधारभूत ढांचा दिया जाए जिससे जिले की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिले। ऐसे में उन लोगों को सोशल वेलफेयर की योजनाओं से लाभान्वित करना होगा। पर्यटन क्षेत्र की जो योजनाएं हैं उनका लोगों को सीधे-सीधे लाभ मिले इस पर भी विशेष फोकस रहेगा।

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