कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए वेतन की ऊपरी सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। इस बदलाव से उत्तराखंड में करीब 40 हजार अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे में आ सकेंगे। भारत सरकार की ओर से यह घोषणा 17 सितंबर को विश्वकर्मा दिवस की पूर्व संध्या पर की गई थी।
रोजगार सृजन और विवाद निपटारे पर भी फोकस
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 वीवीबी सिंह ने कहा कि ईपीएफओ की ओर से सामाजिक सुरक्षा कवरेज को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का उद्देश्य रोजगार सृजन और रोजगार के औपचारिकीकरण को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत अतिरिक्त रोजगार पैदा करने पर नियोक्ताओं को प्रोत्साहन दिया जाता है। बीती 19 जून को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस योजना की पहली किस्त जारी की थी। गढ़वाल क्षेत्र में प्रथम किस्त के दौरान पात्र कर्मचारियों और नियोक्ताओं को लगभग 19 करोड़ की राशि वितरित की जा चुकी है।
कर्मचारी नामांकन अभियान-2026
जो पात्र कर्मचारी अब तक ईपीएफ कवरेज से बाहर हैं, उन्हें दायरे में लाने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है। इसमें नियोक्ताओं को कर्मचारियों का कार्योत्तर नामांकन करने का मौका मिलेगा, जिसमें पिछले अनसॉर्टेड अंशदान से राहत और केवल 100 रुपये का रियायती हर्जाना जैसे लाभ हैं। इसके अलावा ईपीएफ बकाया के विलंबित भुगतान से जुड़े धारा 14बी के लंबित मामलों के निपटान के लिए ईपीएफओ ने विश्वास योजना शुरू की है। इसके तहत दंडात्मक नुकसान को घटाकर एक फीसदी प्रतिमाह कर दिया गया है। क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून में अब तक 70 लाख रुपये की राशि के 54 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।








