बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। ग्रीष्मकाल के लिए मंदिर के कपाट बृहस्पतिवार को सुबह ठीक सवा छह बजे विधि-विधान के साथ खुलेंगे। मंदिर परिसर से लेकर आसपास के प्राचीन मठ-मंदिरों तक को 25 कुंतल ऑर्किड और गेंदे के फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र जगमगा उठा है। वहीं, मुख्य सिंह द्वार पर पहली बार फलों से सजावट की गई है।
आज उद्दव, तेल कलश और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी बदरीनाथ धाम पहुंच गई जबकि कुबेर की डोली रात्रि प्रवास के लिए बामणी गांव पहुंची। वहीं, सुबह दस बजे योग मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद देव डोलियां बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हुईं।
डोलियों के साथ बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) अमरनाथ नंबूदरी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी आचार्य रविंद्र भट्ट, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी और कुबेर देवरा समिति के पदाधिकारी भी बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हुए। दोपहर बाद कुबेर की डाेली बामणी गांव पहुंची।
यहां श्रद्धालुओं ने डोलियों का फूल मालाओं से स्वागत किया। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में बदरीनाथ की स्तुति की। अब बृहस्पतिवार को सुबह बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुल जाएंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री बुधवार को ही रात्रि प्रवास के लिए बदरीनाथ पहुंच गए थे।
उन्होंने कहा कि भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना बेहद जरूरी है। पुलिस उपाधीक्षक मदन बिष्ट ने बाहरी जिलों से आए पुलिस बल को क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और तैयार किए गए यातायात प्लान की जानकारी दी।









