दिव्यांश मर्डर केस- 4 दिन तक डंडे और बेल्ट से पीटा, एक दिन बिना कपड़ों के भी रखा

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मासूम दिव्यांश की हत्या के मामले में हर दिन नए और खौफनाक खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच और डॉक्टरों के पैनल द्वारा की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हो गया है कि 11 साल के दिव्यांश को मौत से पहले दर्दनाक यातनाएं दी गई थीं। उसे न केवल बेरहमी से पीटा गया, बल्कि अमानवीय तरीके से प्रताड़ित भी किया गया।

 

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दिव्यांश को पिछले चार दिनों से लगातार पीटा जा रहा था। उसे डंडे, बेल्ट और थप्पड़ों से इस कदर मारा गया कि उसके शरीर के हर हिस्से पर चोट के निशान उभरे थे। जांच में सामने आया है कि सजा के तौर पर मासूम को एक पूरा दिन बिना कपड़ों के रखा गया था। 

डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम  
गुरुकुल के स्टाफ ने खुलासा किया कि संचालक सौरभ उर्फ कन्हैया मिश्रा जब किसी बच्चे से नाराज होता था, तो उसे खाना तक नहीं दिया जाता था। बुधवार देर रात डॉक्टरों के पैनल ने दिव्यांश के शव का पोस्टमार्टम किया, जिसकी पूरी वीडियोग्राफी भी कराई गई।

 

कमर से कंधों तक सिर्फ चोटें
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दिव्यांश की कमर, जांघ और कंधों पर डंडे और बेल्ट के बक्कल से पिटाई के गहरे काले निशान मिले हैं। हालांकि, रिपोर्ट में किसी भी तरह के यौन उत्पीड़न या गलत कार्य होने के सबूत नहीं मिले हैं। साथ ही, सिगरेट से जलाने की बातों की भी पुष्टि नहीं हुई है।

अनुशासन के नाम पर टॉर्चर
आरोपी संचालक जिसे अनुशासन का नाम दे रहा था, वह असल में एक मासूम पर किया गया जानलेवा अत्याचार था। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्टाफ के बयानों को आधार बनाकर आरोपी के खिलाफ कोर्ट में सख्त पैरवी की तैयारी कर रही है।

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संचालक और प्रेमिका को भेजा जेल
लखनऊ के स्कूल में पिटाई से हुई 11 साल के दिव्यांश की हत्या में आरोपी स्कूल संचालक कन्हैया मिश्रा को पुलिस ने गुरुवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। उसके साथ आलमनगर की रहने वाली महिला मित्र हर्षिता सोनी की भी गिरफ्तारी हुई। हर्षिता पर साक्ष्य मिटाने और बच्चों को घर भेजने का आरोप है। शुक्रवार को कोर्ट में पेशी के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है।

ये था पूरा मामला
महाराजपुर के गौरिया गांव निवासी नरेंद्र कुमार द्विवेदी के बेटे दिव्यांश की पिटाई से मौत हो गई थी। उसे पढ़ाई करने के लिए हफ्ते भर पहले लखनऊ के आलमनगर स्थित रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल भेजा गया था। लखनऊ निवासी स्कूल संचालक दिव्यांश के शव को छोड़कर फरार हो गया था।

नाक व मुंह से निकल रहा था खून
घरवालों को सीढ़ियों से नीचे गिरने की जानकारी दी गई थी। बच्चे के शरीर पर पिटाई के 39 से 40 निशान मिले, जबकि नाक व मुंह से खून निकल रहा था। पुलिस ने स्कूल संचालक और अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की। स्कूल संचालक फरार था, उसका मोबाइल नंबर भी बंद आ रहा था।

सीसीटीवी कैमरों के साथ की गई थी छेड़छाड़
डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि पुलिस ने गुरुकुल स्कूल में जाकर जांच की, जिसमें एक भी बच्चा नहीं मिला। वहां के सीसीटीवी कैमरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। अभिलेख और डीवीआर गायब था। जांच करने पर लखनऊ निवासी हर्षिता सोनी का नाम सामने आया। यह कन्हैया मिश्रा की महिला मित्र है। पुलिस ने उसे और स्कूल संचालक को गिरफ्तार कर लिया।

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थप्पड़ों से हो रही थी पिटाई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दिव्यांश की चार दिन से पिटाई हो रही थी। उसे डंडे, बेल्ट, थप्पड़ों से पीटा जा रहा था। एक दिन बिना कपड़ों के रखा था। गुरुकुल स्कूल के स्टाॅफ का कहना है कि जब किसी बच्चे पर संचालक नाराज रहते थे तो उसको खाना नहीं दिया जाता था। दिव्यांश के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है। बच्चे के शरीर डंडे, बेल्ट के निशान उसके कमर, पीछे, जांघ, कंधे पर मिले हैं।

आरोपी बोला- बचपन में उसकी होती थी पिटाई
डीसीपी पूर्वी ने बताया कि आरोपी स्कूल संचालक ने पूछताछ में बताया कि उसके पिता गुरुकुल के नियम मानते थे। बचपन में उसकी जरा सी गलतियों पर बुरी तरह से पिटाई होती थी। इसका असर उसके व्यवहार में आ गया है। दिव्यांश गुरुकुल के नियम नहीं मान रहा था। साथ के अन्य लड़कों को परेशान कर रहा था। उसको समझाया जा रहा था लेकिन नहीं माना। एकदम से गुस्सा आ गया और पिटाई में उसकी जान चली गई।

 

 

विधानसभा अध्यक्ष के आश्वासन पर हुआ अंतिम संस्कार
बुधवार देर रात पोस्टमार्टम के बाद बच्चे का शव गांव में पहुंचा जहां परिजन और रिश्तेदार गुस्से में भर गए। उन्होंने आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने घरवालों को बच्चे का अंतिम संस्कार कराने के लिए कहा लेकिन उन्होंने पहले गिरफ्तारी की मांग की। सुबह लगभग 11 बजे विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना परिजन से मिले। उन्होंने परिवार को आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और आर्थिक मदद दिलवाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद दोपहर 12 बजे ड्याेढ़ी घाट पर शव का अंतिम संस्कार हुआ।

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