बंगाल में सियासी उलटफेर- नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस टीएमसी में शामिल, BJP को बताया ‘ऐतिहासिक गलती’

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श्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। इसी बीच राज्य की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए हैं। चंद्र कुमार बोस ने यह फैसला आगामी दो चरणों वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है। सियासी गलियारों में इसे भाजपा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

भाजपा के साथ जुड़ाव को बताया ‘ऐतिहासिक गलती’
टीएमसी का दामन थामते ही चंद्र कुमार बोस ने अपने पूर्व दल पर तीखे हमले किए। उन्होंने सितंबर 2023 में वैचारिक मतभेदों का हवाला देते हुए भाजपा छोड़ी थी। अब उन्होंने खुलकर कहा कि भाजपा में शामिल होना उनके जीवन की एक ऐतिहासिक गलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का एकमात्र लक्ष्य चुनाव जीतने के लिए लोगों के बीच विभाजन और ध्रुवीकरण पैदा करना है।

बोस ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मैं सांप्रदायिकता से सांप्रदायिकता के जरिए नहीं लड़ सकता। अगर किसी पार्टी का मकसद सिर्फ समाज को बांटना है, तो मैं वहां नहीं रह सकता। उन्होंने देश की संरचना को बचाने के लिए सभी समुदायों और इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं से एकजुट होने की अपील की।

वोटर लिस्ट में धांधली का उठाया मुद्दा
हाल के दिनों में चंद्र कुमार बोस ने बंगाल की मतदाता सूची में सुधार (एसआईआर) की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के जरिए बंगाल के लगभग 90 लाख लोगों ने अपने वोट देने का अधिकार खो दिया है, जिनमें कई वास्तविक मतदाता भी शामिल हैं।

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बोस का आरोप है कि चुनाव आयोग अपने आकाओं के इशारे पर काम कर रहा है और बंगाल में स्वतंत्र चुनाव कराने में विफल रहा है। उन्होंने बंगाल के प्रगतिशील लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी लोकतांत्रिक शक्ति को बचाने के लिए उठ खड़े हों।

2026 की चुनावी जंग हुई तेज
बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जिसके नतीजे 4 मई को आएंगे। 2021 के चुनावों में TMC ने 213 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था, लेकिन भाजपा भी 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी। ऐसे में चंद्र कुमार बोस जैसे चेहरे का पाला बदलना आने वाले चुनाव के परिणामों पर रोचक असर डाल सकता है।


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