टीएमसी में टूट के बाद अभिषेक बनर्जी ने संभाला मोर्चा, पार्टी सांसदों के साथ ओम बिरला से मिलने पहुंचे

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तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों द्वारा नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय का दावा किए जाने के बाद पार्टी ने मोर्चा संभाल लिया है। इस राजनीतिक संकट के बीच टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी शुक्रवार को पार्टी सांसदों के साथ संसद पहुंचे और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर रहे हैं। टीएमसी का कहना है कि पार्टी एकजुट है और किसी भी सांसद के अलग होने से उसकी संवैधानिक पहचान प्रभावित नहीं होती। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

 

अभिषेक बनर्जी संसद पहुंचने के बाद सीधे लोकसभा अध्यक्ष से मिलने गए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी शाम पांच बजे बैठक है और उसके बाद ही वह इस मुद्दे पर विस्तार से बोलेंगे। इस मुलाकात को टीएमसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी 20 बागी सांसदों के विलय के दावे को चुनौती दे रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा जाए।

 

क्या पार्टी ने विलय के दावे को खारिज किया है?

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि टीएमसी एक ही पार्टी है और जो भी सांसद पार्टी छोड़ते हैं, उन्हें टीएमसीका हिस्सा नहीं माना जा सकता। रॉय ने कहा कि जिस तरह से पार्टी में विभाजन का दावा किया जा रहा है, वह संविधान और संसदीय नियमों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें एनसीपीआई के बारे में कोई जानकारी नहीं है और इस बारे में उन्हीं सांसदों से सवाल पूछा जाना चाहिए जिन्होंने विलय का दावा किया है।

क्या सौगत रॉय ने राजनीतिक दबाव की बात कही?

सौगत रॉय ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक दलों के नेताओं को कभी प्रलोभन देकर तो कभी दबाव बनाकर अपने पक्ष में करने की कोशिश करती है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष मामले का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके बयान से साफ संकेत मिला कि TMC इस बगावत के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जता रही है।

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क्या पार्टी के अंदरूनी विवाद पर भी चर्चा हुई?

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात से पहले टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी भी अभिषेक बनर्जी के आवास पहुंचे। इस दौरान कल्याण बनर्जी से सांसद काकोली घोष दस्तिदार की शिकायत को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वे वहां उस मुद्दे पर बात करने नहीं आए हैं। वहीं महुआ मोइत्रा ने कहा कि “कल्याण दा इतने बुरे दौर में नहीं हैं कि उन्हें अब काकोली दी के खिलाफ बोलना पड़े।” इन बयानों से साफ है कि पार्टी फिलहाल अपना पूरा ध्यान बागी सांसदों के मुद्दे पर केंद्रित रखना चाहती है।

क्या बागी सांसदों के खिलाफ होगी कार्रवाई?

अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी सांसदों की सक्रियता यह संकेत देती है कि पार्टी इस मामले को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चुनौती देने की तैयारी में है। लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद पार्टी की अगली रणनीति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल टीएमसी का दावा है कि पार्टी एकजुट है और बागी सांसदों के कदम को वैधानिक मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद और पश्चिम बंगाल की राजनीति दोनों में बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।


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