पश्चिम एशिया तनाव- खतरे में अमेरिका-ईरान शांति समझौता, लेबनान पर इस्राइल ने बरसाए बम, तेहरान ने बातचीत रोकी

स्राइल की सेना ने दक्षिणी लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इस हवाई हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस्राइल अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस्लामाबाद समझौते को ठेंगा दिखा रहा है? हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले के दौरान आईडीएफ के चार सैनिक बलिदान हुए हैं।

 

खुला होर्मुज जलमार्ग, टोल टैक्स पर फंसा पेंच; शिपिंग इंडस्ट्री की थमी सांसें

अमेरिका और इरान के बीच हुए समझौते के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है, लेकिन भविष्य में इरान की ओर से टोल टैक्स लगाए जाने की आशंका पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल, शिपिंग और ऊर्जा सेक्टर में अनिश्चितता का माहौल है। हालांकि, दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत शुरुआती 60 दिनों के लिए जहाजों को ‘बिना किसी शुल्क के सुरक्षित मार्ग’ की गारंटी दी गई है, लेकिन इस अवधि के बाद जलमार्ग के स्थायी प्रशासन और समुद्री सेवाओं को तय करने के लिए इरान, ओमान और अन्य खाड़ी देशों के बीच होने वाली आगामी त्रिपक्षीय वार्ता पर दुनिया भर के जहाज मालिकों और ऊर्जा कंपनियों की नजरें टिकी हुई हैं।

आम लोगों पर ड्रोन से हमले कर रहा इस्राइल; 18 की मौत 33 घायल

दक्षिणी लेबनान में इस्राइली हमले में एक और व्यक्ति की मौत के बाद मरने वाले लोगों की संख्या 18 पहुंच गई है। लेबनान की नेशनल न्यूज़ एजेंसी (NNA) की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार आधी रात से हमले जारी हैं। इस्राइली ड्रोन से हमले कर रहा है। लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, आधी रात के बाद हमलों में 33 अन्य लोग घायल भी हुए हैं।

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लेबनान के साथ टकराव में इस्राइली सेना के चार सैनिक बलिदान

इस्राइल और लेबनान के बीच ताजा संघर्ष के दौरान चार सैनिक मारे गए हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई पर एसोसिएटेड प्रेस के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक इस्राइली सेना ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में लड़ाई तेज हो गई है। भीषण गोलाबारी के दौरान चार सैनिक बलिदान हुए हैं।

लेबनान को लेकर क्या मांग कर रहा ईरान?

ईरान का कहना है कि दक्षिणी लेबनान पर इस्राइल के हमले बंद होने के साथ कब्जा भी खत्म होना चाहिए। दूसरी तरफ इस्राइल का कहना है कि ईरान समर्थित शिया मिलिशिया हिजबुल्लाह के कारण खतरा बना हुआ है। इस कारण सेना पीछे नहीं हटेगी। इस्राइल की दलील है कि हिजबुल्ला से लड़ने के लिए उसे पूरी आजादी चाहिए, क्योंकि इसके लड़ाके उत्तरी इस्राइल पर हमले करते रहे हैं।

जिनेवा में होने वाली बातचीत क्यों टली?

बातचीत टलने की यह खबर तब आई जब हिजबुल्ला से राजनीतिक रूप से जुड़े पैन-अरब सैटेलाइट चैनल ‘अल-मायादीन’ पर इससे जुड़ी खबर प्रसारित हुई। इसमें बताया गया कि लेबनान में इस्राइल के सैन्य अभियान की वजह से ईरान अपना प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड भेजने में देरी कर रहा है।

111 दिनों की जंग में कितना नुकसान हुआ?
इसी साल 28 फरवरी को शुरू हुई जंग में इस्राइल ने अमेरिका के साथ मिलकर तेहरान में कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। बीते 111 दिनों की लड़ाई के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत अधिकांश उच्च पदस्थ लोगों की जान गई। बाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति बहाल करने को लेकर बातचीत शुरू हुई। इसमें इस्राइल की तरफ से लगातार किए जा रहे हमले का मुद्दा अहम रहा है।

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