हिमाचल: कांग्रेस से बागी होकर BJP में शामिल हुए पूर्व विधायकों को HC से बड़ी राहत, पेंशन जारी करने के आदेश

Spread the love

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में शामिल हुए 4 पूर्व विधायकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अयोग्य घोषित किए गए इन बागी विधायकों को विधानसभा से मिलने वाली पेंशन जारी करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिए कि पात्र याचिकाकर्ताओं की बकाया और नियमित पेंशन एक माह के भीतर जारी की जाए।

 

आदेश का पालन नहीं करने पर क्या होगा?
आदेशों का पालन नहीं होने की स्थिति में 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह आदेश जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने दिए। कोर्ट में राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की गई थी, जिनमें पेंशन जारी करने की मांग की गई थी। बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बाद से ये बागी विधायक पेंशन से वंचित थे। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद भाजपा ने सुक्खू सरकार पर जुबानी हमला किया है।

 

भाजपा प्रवक्ता आशीष शर्मा सुक्खू सरकार पर बरसे
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सुक्खू सरकार की राजनीति ‘समान दृष्टि’ नहीं बल्कि ‘बदले की भावना’ पर आधारित है। भाजपा प्रवक्ता आशीष शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही झूठ गढ़ने, विपक्ष को निशाना बनाने और विरोध करने वाले नेताओं को परेशान करने की नीति अपनाई, लेकिन अब न्यायालय के फैसले ने उनके इस एजेंडे पर सीधा प्रहार किया है। 

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश दिनांक 07.04.2026 में स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित संशोधन विधेयक की प्रभावशीलता पूर्व प्रभाव नहीं हो सकती और यह केवल भविष्य के लिए ही लागू होगा। न्यायालय ने साफ निर्देश दिए कि संबंधित पूर्व विधायकों को उनकी पेंशन एवं बकाया राशि एक माह के भीतर जारी की जाए, अन्यथा राज्य को 6% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।

और पढ़े  हिमाचल: देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़, 3 महिलाओं को किया रेस्क्यू, तीन आरोपी गिरफ्तार

‘कानून किसी व्यक्ति विशेष को टारगेट करने के लिए नहीं बनाए जाते’
भाजपा प्रवक्ता आशीष शर्मा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा यह फैसला सुक्खू सरकार के गाल पर तमाचा है। कांग्रेस ने कानून को बदले का हथियार बनाने की कोशिश की, लेकिन न्यायालय ने साफ कर दिया कि कानून किसी व्यक्ति विशेष को टारगेट करने के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि भविष्य के लिए बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा लाया गया 2024 का संशोधन बिल, जिसमें अयोग्य घोषित विधायकों (10वीं अनुसूची) की पेंशन रोकने का प्रयास किया गया, पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित था। लेकिन सरकार को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसे वह बिल वापस लेना पड़ा। इसके बाद 2026 में नया संशोधन लाया गया, जिसकी सीमा केवल 14वीं विधानसभा के बाद के विधायकों तक सीमित रखी गई—यह स्वयं साबित करता है कि पहले किया गया कदम गलत और असंवैधानिक था।

‘यह लोकतंत्र नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण’
आशीष शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने दो वर्षों तक पूर्व विधायकों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया। उनकी वैध पेंशन रोकी गई, उन्हें न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़े- यह लोकतंत्र नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची का दुरुपयोग करते हुए पेंशन रोकने का प्रयास किया गया, जबकि यह प्रावधान केवल सदस्यता समाप्ति तक सीमित है, न कि पूर्व अधिकारों को समाप्त करने के लिए। कांग्रेस सरकार ने संविधान को अपने हिसाब से मोड़ने की कोशिश की, लेकिन न्यायपालिका ने स्पष्ट कर दिया कि कानून के साथ ‘मनमानी’ नहीं चलेगी।

‘फैसला संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत’
आशीष शर्मा ने आगे कहा कि यह पूरा प्रकरण कांग्रेस सरकार की ध्यान भटकाने की राजनीति का उदाहरण है जहां अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए मुद्दों को भटकाया जाता है और विपक्ष को टारगेट किया जाता है। पहले दिन से ही कांग्रेस सरकार की एक ही सोच रही कि झूठ कैसे गढ़ना है, विपक्ष को कैसे दबाना है और विरोध करने वालों को कैसे परेशान करना है। लेकिन अब अदालत ने सच्चाई सामने ला दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल पूर्व विधायकों की जीत नहीं, बल्कि रूल ऑफ लॉ, संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत है।

और पढ़े  हिमाचल: अधिकारियों-कर्मचारियों के सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति पर लगाई रोक, एसडीओ को दे दिया पुनर्रोजगार

अंत में भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को प्रदेश की जनता के बीच लेकर जाएगी और बताएगी कि कैसे कांग्रेस सरकार ने कानून का दुरुपयोग कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया। यह सरकार ‘बदले की भावना’ से चल रही है, न कि ‘समान दृष्टि’ से और अब जनता भी इसका जवाब देने के लिए तैयार है।


Spread the love
  • Related Posts

    हिमाचल: देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़, 3 महिलाओं को किया रेस्क्यू, तीन आरोपी गिरफ्तार

    Spread the love

    Spread the loveहिमाचल प्रदेश ऊना जिला मुख्यालय में गुरुवार को पुलिस ने हमीरपुर-ऊना सड़क किनारे एक ढाबे व गेस्ट हाउस में देह व्यापार के रैकेट का पर्दाफाश किया। शहर के…


    Spread the love

    हिमाचल: अधिकारियों-कर्मचारियों के सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति पर लगाई रोक, एसडीओ को दे दिया पुनर्रोजगार

    Spread the love

    Spread the loveहिमाचल प्रदेश सरकार ने सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति या दोबारा काम रखने पर रोक लगा दी है। इस संबंध में मंगलवार को कार्मिक विभाग की ओर से सभी प्रशासनिक…


    Spread the love