रामनवमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को अयोध्या ने एक ऐसा अलौकिक दृश्य देखा, जिसने हर श्रद्धालु के हृदय को भावविभोर कर दिया। रामलला का ‘सूर्य तिलक’ एक ऐसा क्षण रहा जहां अध्यात्म और विज्ञान एकाकार होते नजर आए। दोपहर ठीक 12 बजे, जैसे ही रामजन्म का पावन क्षण आया, सूर्य की किरणों ने सीधे गर्भगृह में प्रवेश कर छह मिनट तक रामलला के ललाट को आलोकित किया। यह सूर्य तिलक केवल एक दृश्य नहीं बल्कि युगों-युगों तक स्मरण रहने वाला अनुभूति बन गया।
इस जन्मोत्सव एक और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। सुबह से ही आसमान में बादल छाए थे, सूर्य देवता के दर्शन नहीं हुए थे, लेकिन ठीक 11:55 बजे यानी सूर्य तिलक से पांच मिनट पहले सूर्य देव ने दर्शन दिए और सूर्य तिलक के 10 मिनट बाद पुन: सूर्य बादलों में छिप गए। यह दृश्य मानो स्वयं सूर्यवंश के आराध्य का सूर्यदेव की ओर से अभिषेक की अनुभूति करा गया। सुबह ब्रह्ममुहूर्त में 3:30 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही दिनभर पूजा-अर्चना, शृंगार और भजन-कीर्तन का क्रम चलता रहा।
रत्न जड़ित पीले वस्त्र और स्वर्ण मुकुट में सुसज्जित रामलला की मनोहारी छवि के दर्शन कर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होते रहे। जैसे-जैसे समय 12 बजे के करीब पहुंचा, मंदिर परिसर में उत्साह और श्रद्धा का ज्वार उमड़ता गया। जन्म के पावन क्षण पर जैसे ही गर्भगृह के कपाट खुले, घंटा-घड़ियालों की गूंज के बीच भक्तों ने “भए प्रकट कृपाला दीनदयाला…” का सामूहिक गान शुरू कर दिया। उसी समय सूर्य की किरणों ने रामलला के मस्तक पर तिलक कर इस दिव्य क्षण को पूर्णता प्रदान की। इस अद्भुत सूर्य तिलक के दर्शन देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में लाइव प्रसारण के माध्यम से करोड़ों श्रद्धालुओं ने किए। यह क्षण हर रामभक्त के हृदय में ‘बालक राम’ की छवि को और गहराई से स्थापित कर गया।
अनुष्ठानों की झलक
– सुबह 3:30 बजे रामलला कर शृंगार और आरती
– 4:00 बजे मंगला आरती के साथ कपाट खुले
– 11:10 बजे जन्मोत्सव पूजन प्रारंभ
– 11:30 बजे पंचामृत अभिषेक, 56 भोग अर्पित किए गए
– 12:00 बजे जन्म आरती और सूर्य तिलक
इस बार बढ़ा सूर्य तिलक का समय
– राम जन्मोत्सव पर इस बार ‘सूर्य तिलक’ का समय पिछले वर्ष की तुलना में दो मिनट अधिक रहा। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि हर वर्ष सूर्य तिलक के समय में कुछ न कुछ वृद्धि होगी। ऐसा वैज्ञानिकों ने बताया है। 2024 में पहला व 2025 में दूसरी बार हुए सूर्य तिलक के दौरान सूर्य की किरणों ने चार मिनट तक रामलला के मस्तक पर अभिषेक किया था।
विज्ञान के जरिए साकार हुआ 75 मिमी का तिलक
यह दिव्य दृश्य केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक का भी अद्भुत उदाहरण रहा। मंदिर के शिखर पर लगे दर्पण से सूर्य की किरणें परावर्तित होकर विशेष पीतल के पाइप में प्रविष्ट हुईं। पाइप में लगे दर्पण और तीन लेंसों से गुजरते हुए किरणों ने दो बार 90 डिग्री का कोण बनाया और अंततः गर्भगृह में पहुंचकर रामलला के ललाट पर लगभग 75 मिमी का तिलक अंकित किया। विशेष ध्यान रखते हुए इन किरणों की गर्मी को 50 प्रतिशत तक कम किया गया, जिसके लिए आईआर फिल्टर ग्लास का प्रयोग किया गया, ताकि भगवान के विग्रह पर किसी प्रकार की ऊष्मा का प्रभाव न पड़े।







