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गाजियाबाद की राजनगर एक्सटेंशन की राज एम्पायर सोसायटी से हरीश के एम्स जाने के बाद भी रविवार को हर तरफ उनकी चर्चा होती रही। कुछ लोगों ने परिजनों से संपर्क करने के लिए कई बार फोन लगाया, लेकिन किसी ने नहीं उठाया।
बहुत सारे लोगों को शनिवार को उनके एम्स जाने की जानकारी नहीं थी। रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण हर किसी को इस बारे में पता चला। सुबह बारिश होने के कारण तो लोग आपस में नहीं मिल सके लेकिन शाम को सबने पार्क में बैठकर इस मुद्दे पर चर्चा की।
निवासी ब्रजराज सिंह ने बताया कि सोसायटी के कुछ करीबियों ने पिता और बेटे को फोन लगाया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। किसी ने ज्यादा प्रयास नहीं किया, क्योंकि वह कई बार निजता व शांति की अपील कर चुके हैं।
सभी ने मिलकर सोसायटी के वरिष्ठ केशव कुमार को उनके परिवार के संपर्क में रहने का जिम्मा सौंपा है, ताकि कोई जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल मदद दी जाए।
निवासी अनिल राज कहते हैं कि बार-बार हर किसी की ओर से उन्हें डिस्टर्ब करना ठीक नहीं है। कुछ लोगों ने बताया कि पता चला है कि लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटा दिया गया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
पहले दिन हटाएं खाने और सांस लेने के पाइप
एम्स के डॉ. बीआर आंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) के पैलिएटिव केयर यूनिट में शनिवार को भर्ती हुए हरीश राणा की निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) प्रक्रिया शुरू हो गई है।
अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति की निगरानी करते हुए चरणबद्ध तरीके से जीवनरक्षक उपकरणों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। एम्स इस मामले में आधिकारिक बयान नहीं दे रहा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने की बात कह रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हरीश के शरीर से लाइफ सपोर्ट से जुड़े दो प्रमुख पाइप सांस लेने के लिए ट्रैकियोस्टॉमी ट्यूब और पोषण के लिए पीईजी फीडिंग ट्यूब को हटा दिया हैं। यह प्रक्रिया पूरी देखभाल, दर्द-रहित तरीके से और धीरे-धीरे की जा रही है।
डॉक्टरों की पूरी कोशिश है कि हरीश को तकलीफ न हो और वे प्राकृतिक, सम्मानजनक तरीके से अंतिम यात्रा पूरी करें। अस्पताल सूत्रों के अनुसार हरीश की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि, सूत्रों ने हरीश की स्थिति को देखते हुए आशंका जताई है कि करीब एक-दो दिन में वह इस पीड़ा से मुक्त हो जाएंगे।