असम- 2 साल तक हिरासत में रहने वाली विदेशी महिला को मिली भारत की नागरिकता, कौन हैं दीपाली दास?

Spread the love

 

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के लागू होने के बाद असम के कछार जिले में दो साल तक नजरबंदी में रहने के बाद एक महिला को भारतीय नागरिकता दी गई है।  59 वर्षीय दीपाली दास, जो ढोलाई विधानसभा क्षेत्र के हवैथांग इलाके की निवासी हैं, को फरवरी 2019 में विदेशी ट्रिब्यूनल (एफटी) ने अवैध प्रवासी घोषित किया था।

 

दीपाली दास की नागरिकता का सफर

दीपाली दास को विदेशी ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद पुलिस ने मई 2019 में हिरासत में ले लिया था और सिलचर नजरबंद केंद्र भेज दिया था। लगभग दो साल तक नजरबंद रहने के बाद, उन्हें मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमानत मिली। उनके वकील धरमानंद देव के अनुसार,दीपाली मूल रूप से बांग्लादेश के सिलहट जिले के धीराई पुलिस स्टेशन के दिप्पूर गांव की रहने वाली थीं। 1987 में उनकी शादी अभिमन्यु दास से हुई थी, जो हबीगंज जिले के बनीयाचोंग पुलिस स्टेशन के पराई गांव के रहने वाले थे। एक साल बाद, 1988 में, यह जोड़ा भारत आया और कछार जिले में बस गया, जहां वे तब से रह रहे हैं।

नागरिकता पर सवाल और सीएए की भूमिका

दीपाली की नागरिकता पर 2013 में सवाल उठे जब पुलिस ने उनके खिलाफ जांच शुरू की। 2 जुलाई 2013 को पुलिस ने एक आरोप पत्र दायर किया, जिसमें कहा गया कि दीपाली बांग्लादेश के बनीयाचोंग की निवासी थीं और मार्च 1971 के बाद अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थीं। वकील धरमानंद देव ने बताया कि यह आरोप पत्र सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के आवेदन के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि आवेदक को बांग्लादेश, पाकिस्तान या अफगानिस्तान से प्रवासन के दस्तावेजी प्रमाण देने होते हैं। दीपाली के मामले में, 2013 के पुलिसिया आरोप पत्र में स्पष्ट रूप से उनका बांग्लादेश से होना बताया गया था, जिसे अधिकारियों ने मान्य प्रमाण के रूप में स्वीकार किया।

सीएए के तहत आवेदन और नागरिकता प्रमाण पत्र

2021 में जमानत पर रिहा होने के बाद, दीपाली ने सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने की इच्छा जताई। 2024 में अधिनियम के नियमों की अधिसूचना जारी होने के बाद, उन्होंने कानूनी सहायता के लिए वकील धरमानंद देव से संपर्क किया।

उनका पहला सुनवाई पिछले साल 24 फरवरी को सिलचर के डाक अधीक्षक के कार्यालय में हुई, जो ऐसे आवेदनों को संसाधित करने के लिए नामित है। इसके बाद दो और सुनवाई हुईं, जिसके बाद उनके सभी दस्तावेज गृह मंत्रालय (एमएचए) को ऑनलाइन जमा कर दिए गए। सामाजिक कार्यकर्ता कमल चक्रवर्ती ने बताया कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा फील्ड सत्यापन के बाद, दीपाली को पिछले साल 25 मई को सिलचर के डाक अधीक्षक के कार्यालय में अंतिम पेशी के लिए बुलाया गया था। 6 मार्च को उन्हें अपना भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ।

और पढ़े  पाकिस्तान- शिया प्रदर्शनकारियों पर सेना की गोलीबारी, 38 की मौत, भड़के लोगों ने दफ्तरों-आवासों में लगाई आग

बच्चों के लिए महत्वपूर्ण

दीपाली के तीन बच्चों, एक बेटे और तीन बेटियों, के लिए यह नागरिकता प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण है।  क्योंकि सभी बच्चों का जन्म भारत में हुआ है, वे भविष्य में अपनी मां के नागरिकता प्रमाण पत्र के आधार पर अपनी नागरिकता को सुरक्षित रख सकते हैं, यदि कभी कोई सवाल उठाया जाता है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम, जिसे 11 दिसंबर 2019 को संसद में पारित किया गया था, जिससे देश भर में, विशेषकर असम में व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था। इस अधिनियम के तहत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से हिंदू, ईसाई, बौद्ध, सिख, जैन और पारसी प्रवासी जो 25 मार्च 1971 और 31 दिसंबर 2014 के बीच भारत आए थे, वे भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।


Spread the love
  • Related Posts

    सुंदर पिचाई- गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई की सैलरी में छप्परफाड़ इजाफा, मिलेंगे ₹6361 करोड़

    Spread the love

    Spread the loveटेक जगत से एक बड़ी खबर सामने आई है और इस खबर ने तकनीक की दुनिया में हलचल मचा दी है। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने अपने सीईओ…


    Spread the love

    ईरान- पड़ोसी देशों को तब तक निशाना नहीं बनाएंगे,जब तक उनकी जमीन से हमला न हो

    Spread the love

    Spread the loveपश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें ईरान से बिना…


    Spread the love