UIDAI की बड़ी कार्रवाई, 2.5 करोड़ से ज्यादा Aadhaar कार्ड हुए निष्क्रिय, जानें क्या है वजह?

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रकार ने बताया है कि उन्होंने अब तक 2.5 करोड़ से ज्यादा ऐसे आधार कार्ड बंद कर दिए हैं, जो उन लोगों के थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है। चूंकि लोगों की जीवनसीमा निर्धारित है इसीलिए उनके मृत्यु के बाद ऐसे दस्तावेजों को निष्क्रिए करने का काम सरकार करती है। सरकार वे सभी दस्तावेज जो पहचान के लिए जरूरी हैं, का लेखा-जोखा रखती है। यह प्रक्रिया अपडेशन के माध्यम से पूरी की जाती है। सरकार को व्यक्ति की मृत्यु की जानकारी मुख्य रूप से मृत्यु पंजीकरण प्रणाली (सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) के माध्यम से मिलती है। जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है और परिवार मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) बनवाता है तो वह डाटा सरकारी डाटाबेस में दर्ज हो जाता है।

 

इन तरीकों से हो सकते हैं पहचान पत्र निष्क्रिय 

आधार कार्ड: UIDAI ने ‘माईआधार’ पोर्टल पर ‘रिपोर्ट डेथ ऑफ ए फैमिली मेंबर’ (परिवार के सदस्य की मृत्यु की रिपोर्ट करें) नाम की सुविधा शुरू की है। परिवार के सदस्य मृत्यु प्रमाण पत्र और आधार नंबर देकर इसे निष्क्रिय कर सकते हैं। अब तक सरकार लगभग 2.5 करोड़ मृत व्यक्तियों के आधार निष्क्रिय कर चुकी है।

वोटर आईडी: चुनाव आयोग अब सीधे मृत्यु पंजीकरण डाटा का उपयोग कर रहा है। इसके अलावा, परिवार के सदस्य निर्वाचन कार्यालय में फॉर्म नंबर 7 भरकर और मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करके नाम हटवा सकते हैं।

पैन कार्ड: इसे परिवार के सदस्यों को आयकर विभाग (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट) के पास जाकर मैन्युअली सरेंडर करना होता है, विशेषकर तब जब मृतक के टैक्स से संबंधित काम पूरे हो जाएं।

पासपोर्ट: पासपोर्ट वैधता समाप्त होने तक अमान्य माना जाता है, लेकिन इसे सरेंडर करने के लिए नजदीकी पासपोर्ट कार्यालय में मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ आवेदन किया जा सकता है।

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ऐसा क्यों किया गया?

इसका सीधा मकसद यह है कि कोई दूसरा व्यक्ति किसी मृत व्यक्ति के नाम या आधार का गलत इस्तेमाल न कर सके और धोखाधड़ी को रोका जा सके। सरकार चाहती है कि आधार का डाटा बिल्कुल सही और सुरक्षित रहे।

अब तक 2.5 करोड़ से ज्यादा आधार बंद

आईटी मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि भारत में करीब 134 करोड़ लोगों के पास आधार कार्ड है। उन्होंने कहा कि आधार के रिकॉर्ड को एकदम सही रखने के लिए सरकार देशभर में एक सफाई अभियान चला रही है। इसी के तहत अब तक 2.5 करोड़ से ज्यादा उन लोगों के आधार नंबर बंद कर दिए गए हैं, जिनकी मौत हो चुकी है।

दुरुपयोग रोकने के लिए उठाया कदम

मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके आधार कार्ड को बंद करना अनिवार्य है ताकि पहचान की चोरी जैसे अपराधों को रोका जा सके और कोई भी व्यक्ति मृत व्यक्ति के आधार का गलत इस्तेमाल करके सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ न उठा सके।

सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक

धोखाधड़ी को रोकने और सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सरकार ने कई नई सुविधाएं शुरू की हैं। अब आधार कार्ड धारक अपने फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतली (बायोमेट्रिक्स) को ‘लॉक’ कर सकते हैं, जिससे उनकी मर्जी के बिना कोई भी उनके आधार का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। साथ ही, अब चेहरा दिखाकर पहचान (फेस ऑथेंटिकेशन) करने की तकनीक भी जोड़ी गई है, जो यह सुनिश्चित करती है कि लेनदेन के समय वह व्यक्ति खुद वहां मौजूद है। इसके अलावा, बिना इंटरनेट के भी पहचान की पुष्टि करने के लिए सुरक्षित क्यूआर कोड और ई-आधार जैसे आसान तरीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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