ईरान अशांति:  खामेनेई के खिलाफ नहीं थम रहा आक्रोश, मृतकों का आंकड़ा 6 हजार से ज्यदा, ईरान में हालात चिंताजनक

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श्चिम एशिया में अशांति व्याप्त है। हिंसा और विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस्राइली सीमा पर गाजा पट्टी और लेबनान जैसे इलाकों के बाद अब ईरान भी बीते कई हफ्ते से जनाक्रोश का सामना कर रहा है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता सरकार के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद कर रही है। आलम ये है कि देश की सेना और राजधानी तेहरान में तैनात सुरक्षाबलों को भी कानून-व्यवस्था बरकरार रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

 

नहीं थम रहा आक्रोश, मृतकों का आंकड़ा 6,120 के पार
ईरान में हालात कितने चिंताजनक हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की सरकार ने बीते कई दिनों से फोन और इंटरनेट सेवाओं को बंद कर रखा है। अब तक कितने लोग जान गंवा चुके हैं, इसके आंकड़े भी संदिग्ध हैं, क्योंकि अमेरिकी मानवाधिकार एजेंसी – HRANA का दावा है कि अब तक 6126 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, देश की सरकार का दावा है कि मृतकों की संख्या 3117 है। सरकार के मुताबिक मृतकों में 2427 नागरिकों के अलावा सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं।

 

लेबनान में हिजबुल्ला समर्थक खामेनेई के समर्थन में सड़कों पर उतरे
देश और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर आई ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अशांति का असर पड़ोसी देश लेबनान पर भी दिख रहा है। यहां राजधानी बेरूत के एक दक्षिणी उपनगर में रहने वाली महिलाओं ने ईरानी सरकार के साथ एकजुटता दिखाने का प्रयास किया है। बेरूत में आयोजित एक रैली के दौरान हिजबुल्ला समर्थकों को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरों के साथ देखा गया।

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ईरान में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
दरअसल, ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन विशाल रूप ले चुका है। आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई के असर के चलते शुरू हुए विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। आलम यह है कि तेहरान में व्यापारियों का गढ़ कहे जाने वाला ग्रैंड बाजार इन प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है और आर्थिक संकट के खिलाफ उठी आवाज अब सत्ता परिवर्तन की आवाज में बदल चुकी है।

मृतकों के आंकड़ों पर अलग-अलग दावे, विचलित कर रहीं भयावह खबरें
कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मृतकों का आंकड़ा 12 से 20 हजार से अधिक होने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई जानकारी के मुताबिक सेना ने 25 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में भी लिया है। सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान में मौजूद सूत्रों के हवाले से कहा है कि दो सप्ताह से अधिक समय से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक कम से 12 हजार या शायद 20 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

डरावना है मुर्दाघरों के बाहर का मंजर, अपनों को तलाश रहे परिजन
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी तेहरान के बाहरी इलाकों में मुर्दाघरों के बाहर 300-400 शव रखे देखे गए। फॉरेंसिक विभाग के कर्मचारी शवों पर चोट के निशानों का ब्योरा दर्ज करते देखे गए। शवों पर गोली लगने से बने घाव समेत कई गंभीर चोटें भी देखी गईं। शवों के ढेर में स्थानीय लोगों को अपने परिजनों की तलाश में बदहवास भी देखा गया।

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एमनेस्टी की रिपोर्ट में क्या दावे?
दुनियाभर में मानवाधिकार के मुद्दे पर काम करने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी ईरान को लेकर डरावने दावे किए हैं।


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