उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को 1 मार्च 2005 से 31 जुलाई 2016 तक का वेतन देने के निर्देश संबंधित शिक्षा विभाग को दिए है।न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार कुंवर सिंह नेगी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि जब उसने जनता इंटर कॉलेज, कथूर हिंदव टिहरी गढ़वाल कॉलेज में लेक्चरर-इतिहास के रूप में काम किया था। तब उसे 1 मार्च 2005 से 31 जुलाई 2016 की अवधि में का वेतन नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से निदेशक स्कूल शिक्षा द्वारा पारित 25 अगस्त 2022 के आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन को अस्वीकार कर दिया गया।
याचिका में कहा कि उसे कॉलेज में जूनियर क्लर्क के रूप में नियुक्त किया गया था। 30 जून 1995 को उस कॉलेज में प्रिंसिपल का पद खाली हो गया और लेक्चरर इतिहास के वरिष्ठ पद पर करण सिंह रावत को 1 नवंबर 1995 से कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में पदोन्नत किया गया। इसके बाद कॉलेज में लेक्चरर-इतिहास का पद भरा जाना था जिसके लिए आवेदन आमंत्रित किए गए और याचिकाकर्ता को कॉलेज में लेक्चरर-इतिहास के रूप में नियुक्त किया गया। नियुक्ति को मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा 17 जुलाई 1996 को अनुमोदित किया गया था। याचिका में कहा कि नवंबर 2003 तक कॉलेज एक मान्यता प्राप्त सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज था लेकिन उसके बाद इसे 4 दिसंबर 2003 को प्रांतीयकृत कर दिया गया, संस्थान को सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया।
याचिकाकर्ता ने 31 जुलाई 2016 तक लेक्चरर-इतिहास के रूप में काम किया लेकिन उसे वेतन नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह 5 मार्च 2008 को सीनियर असिस्टेंट के पद पर नियुक्त किया गया था। यहां तक कि याचिकाकर्ता को वह वेतन भी दिया जा सकता था जो नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता के पास लेक्चरर इतिहास का पद है। इसलिए वह उसके लिए पारिश्रमिक का हकदार है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सीनियर असिस्टेंट के पद के लिए 1 मार्च 2005 से 31 जुलाई 2016 तक का वेतन देने का निर्देश दिया है।








