जापान के उत्तरी तट पर 7.6 तीव्रता का भूकंप, 2 फीट तक उठीं सुनामी की लहरें, 33 घायल

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जापान के उत्तरी तट के पास  सोमवार को जोरदार भूकंप आया है। जापान के मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.6 मापी गई, जिसका केंद्र आओमोरी और होक्काइडो के तटीय क्षेत्र के निकट था। शक्तिशाली भूकंप के चलते इलाके के तटीय इलाकों में दो फीट तक की सुनामी की लहरें आईं हैं। इस भूकंप में अभी तक 33 लोगों के घायल होने की खबर है।

जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि भूकंप जापान के मुख्य होंशू आइलैंड के सबसे उत्तरी इलाके आओमोरी के ठीक पूरब में और होक्काइडो आइलैंड के ठीक दक्षिण में आया, जिसका केंद्र समुद्र की सतह से लगभग 50 किलोमीटर नीचे था। एजेंसी ने कहा कि होक्काइडो इलाके के उराकावा शहर और आओमोरी इलाके के मुत्सु ओगावारा पोर्ट पर दो फीट तक ऊंची लहरें देखी गईं। सरकारी समाचार चैनल एनएचके ने बताया कि आओमोरी के हाचिनोहे शहर के एक होटल में कई लोग घायल हो गए और इलाके में परमाणु ऊर्जा केंद्रों की सुरक्षा जांच की जा रही है।

 

जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि आओमोरी के दक्षिण में इवाते प्रांत के कुजी बंदरगाह में 70 सेंटीमीटर (दो फुट, चार इंच) तक की सुनामी मापी गई तथा क्षेत्र के अन्य तटीय इलाकों में 50 सेंटीमीटर तक की सुनामी आई।

मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने निवासियों से परामर्श हटाए जाने तक ऊंचे स्थानों पर जाने या आश्रय लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लगभग 800 घरों में बिजली गुल है और क्षेत्र के कुछ हिस्सों में शिंकानसेन बुलेट ट्रेन और कुछ स्थानीय रूट पर सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

एनएचके ने बताया कि मंगलवार सुबह छह बजकर 20 मिनट पर अधिकारियों ने उत्तरी जापान में प्रशांत तटरेखा के लिए सुनामी संबंधी सभी परामर्श हटा लिए। किहारा ने बताया कि क्षेत्र के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में सुरक्षा जांच की जा रही है लेकिन चिंता करने वाली कोई बात सामने नहीं आई है।

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प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने रिपोर्टरों से बातचीत में कहा कि सरकार ने नुकसान का तुरंत अंदाजा लगाने के लिए एक इमरजेंसी टास्क फोर्स बनाई है। उन्होंने कहा, लोगों की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है और जो कुछ भी कर सकते हैं, कर रहे हैं।

 

क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। विज्ञापन

जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।
कितनी तबाही लाता है भूकंप?

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रिक्टर स्केल असर
0 से 1.9 सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2 से 2.9 हल्का कंपन
3 से 3.9 कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर
4 से 4.9 खिड़कियां टूट सकती हैं और दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं।
5 से 5.9 फर्नीचर हिल सकता है।
6 से 6.9 इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9 इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
8 से 8.9 इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं। सुनामी का खतरा।
9 और उससे ज्यादा पूरी तबाही, कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी।

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