9 लोगों की मौत- गहरी नींद में थे, नहीं मिला जान बचाने का मौका, सबसे आखिरी में निकाले इन दोनों के शव

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ई दिल्ली के पालम के साध नगर में सुबह के समय परिवार के सभी लोग नींद के आगोश में थे। यही वजह रही आग लगने पर घर में मौजूद परिवार के 12 लोगों को पता ही नहीं चला। गहरी नींद में सो रहे परिवार की दम घुटने से नींद टूटी लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 

आग की तपिश ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया था। जान बचती नहीं देख इमारत के मालिक राजेंद्र कश्यप के बेटे सचिन और अनिल ने डेढ़ साल की बेटी मिताली के साथ तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। इन तीनों के अलावा इमारत में मौजूद किसी की भी जान नहीं बची। 

 

राजेंद्र कश्यप किसी काम से गोवा गए थे जबकि दूसरे नंबर का बेटा सुनील अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ शिमला गया था। एक बहु मायके अपने बेटे के साथ गर्यी थी। राजेंद्र के 19 लोगों के परिवार में अब 10 लोग बचे हैं, इनमें से भी तीन अस्पताल में भर्ती हैं।

 

परिवार में पत्नी लाडो देवी के अलावा पांच बेटे और एक बेटी थी
एक परिजन दीपक ने बताया कि राजेंद्र पिछले साध नगर मार्केट के प्रधान हैं। वह आम आदमी पार्टी से भी जुड़े थे। परिवार में पत्नी लाडो देवी के अलावा पांच बेटे और एक बेटी थी। लाडो बीमार होने के चलते व्हीलचेयर पर रहती थी।

सबसे बड़ा बेटा कमल, पत्नी आशु और तीन बेटियों निहारिका, इवानी और जैसिका के साथ रहता था। तीसरे नंबर का बेटा प्रवेश था जिसकी पत्नी कविता बेटे व्योम के साथ मायके नजफगढ़ गई थी। चौथे नंबर पर राजेंद्र का बेटा अनिल है जो हादसे के वक्त तीसरी मंजिल पर मौजूद था।
अचानक उसकी नींद खुली तो उसने खुद को फंसा पाया। उसने बेटी के लेकर नीचे छलांग लगा दी। अनिल पत्नी दीपिका की अग्निकांड में मौत हो गई है। पांचवां बेटा सचिन अविवाहित है जो हादसे के समय दूसरी मंजिल पर था। आग लगी तो उसने पड़ोसी की छत पर कूदकर जान बचाई।
Delhi Fire Being in the embrace of sleep left no opportunity to save a life
सबसे आखिरी में निकाले गए लाडो, हिमांशी के शव
आग पर काबू पाने के दौरान एक दमकल कर्मियों की एक टीम ऊपर फंसे हुए लोगों को निकालने पहुंची तो वहां से एक के बाद एक करके सात शव निकाले गए। दूसरी मंजिल से लाडो देवी और हिमांशी के शव सबसे आखिरी में 11 बजे निकाले गए।

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दमकल कर्मियों को पता नहीं था कि अंदर कितने लोग और मौजूद हैं। बाद में एक परिजन वहां पहुंचे और उन्होंने बताया कि लाडो देवी और बेटी का कुछ पता नहीं है। इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाकर दोनों के शव बरामद किए गए। शव पहचान में नहीं आ रहे थे।
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इमारत का डिजाइन बना इतने बड़े हादसे की वजह
पालम में जिस इमारत में आग लगी उसका डिजाइन कुछ इस तरह का था कि वहां से सुरक्षित निकलना मुश्किल हो गया। ग्राउंड फ्लोर से लेकर पहली और दूसरी मंजिलों को सामने की ओर से शीशा लगाकर पूरी पैक कर दिया गया था। तीसरी मंजिल की बालकनी खुली थी।

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यही वजह रही कि वेंटिलेशन नहीं होने से धुएं की वजह से लोगों का दम घुटा। दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बचाव दल पहुंचा तो आग तक पानी पहुंचाना मुश्किल हो रहा था। क्रेन वाली गाड़ी की मदद से शीशों को तोड़ा तब जाकर अंदर पानी पहुंचाया गया।
दीवार तोड़ने की कोशिश की थी
पड़ोसी रघुनंदन शर्मा ने बताया कि पास की छत पर जाकर दीवार का हिस्सा तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन धुआं इतना घना था कि अंदर जाना असंभव था। स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह लगभग 6:30 बजे एक फूल बेचने वाले ने आग देख पड़ोसियों को सूचित किया था।

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कपल स्कूल कैब चालक कमल ने बताया कि जब फायर ब्रिगेड आई, तो उसके प्रेशर सिस्टम में खराबी थी। यदि उपकरण काम करता तो कुछ की जान बच जाती।
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आप ने फायर ब्रिगेड, दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
पालम इलाके में पांच मंजिला इमारत में भीषण अग्निकांड को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली सरकार को घेरा है। आप के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार के नकारेपन की वजह से लोगों की जान चली गई। आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इसे हादसा नहीं बल्कि सरकारी लापरवाही का परिणाम बताया।

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सौरभ ने आरोप लगाया कि फायर ब्रिगेड के पास बचाव के लिए जरूरी सीढ़ियां और हाइड्रोलिक लिफ्ट तक नहीं थीं, जिससे लोगों की जान बचाई नहीं जा सकी। भारद्वाज ने दावा करते हुए बताया कि आग लगने के समय इमारत की तीसरी मंजिल पर पूरा परिवार बालकनी में खड़ा था और मदद के लिए चीख रहा था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि फायर ब्रिगेड घटना स्थल पर देर से पहुंची और उसकी हाइड्रोलिक लिफ्ट काम नहीं कर रही थी। भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार वीआईपी क्रूज और अन्य फालतू खर्चों में व्यस्त है, जबकि नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए।

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बिजली के मकड़जाल भी मदद में बने बाधक 
राजधानी में बिजली के तारों का जाल फिर जानलेवा साबित हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तार इतने नीचे और पास-पास थे कि कोई भी व्यक्ति आसानी से उन्हें छू सकता था। घटना के बाद दमकल विभाग को आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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पालम के व्यापारी विक्की ने बताया कि बारिश के दिनों में अक्सर स्पार्किंग होती है, जिससे खतरा बना रहता है। अगर यहां कोई हादसा होता है, तो संकरी गलियों के कारण एम्बुलेंस यहां नहीं पहुंच सकेगी। मनोज ने बताया कि प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन हालात जस के तस बने हैं।
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पालम में चार मंजिला इमारत में आग से एक ही परिवार के तीन बच्चों समेत नौ की मौत
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार सुबह एक बहुमंजिला आवासीय इमारत में भीषण आग लग गई। अग्निकांड में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला, उनकी तीन पोतियों समेत एक ही परिवार के नौ सदस्यों की मौत हो गई। एक पोती की उम्र मात्र तीन साल थी। तीन लोग घायल हैं, जिनमें से दो लोगों ने आग से बचने के लिए इमारत से छलांग लगाई थी। आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इसकी जांच की जा रही है।
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दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि सुबह 7:04 बजे पालम गांव थाने में आग लगने की सूचना पर मौके पर राहत और बचाव टीम भेजी गई। करीब 30 फायर टेंडर और 11 एम्बुलेंस के साथ पुलिस, बीएसईएस, एयर फोर्स पुलिस और एनडीआरएफ के कर्मियों को राहत और बचाव अभियान में लगाया गया। पालम मेट्रो स्टेशन के पास राम चौक मार्केट में स्थित इस इमारत में हादसे के समय 15 लोग मौजूद थे। इमारत के बेसमेंट, भूतल और पहली मंजिल पर कपड़े तथा सौंदर्य प्रसाधन का शोरूम था, जबकि शोरूम के मालिक व राम चौक बाजार के अध्यक्ष राजेंद्र कश्यप अपनी पत्नी, पांच बेटों, एक बेटी, चार बहुओं और सात पोते-पोतियों के साथ दूसरी और तीसरी मंजिल पर रहते थे। पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने इमारत की दीवार तोड़कर पीड़ितों को बचाने की कोशिश की। पड़ोसियों ने बताया कि आग शुरू में पहली मंजिल पर लगी थी, लेकिन देखते ही देखते पूरी इमारत को चपेट में ले लिया।
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मृतकों की पहचान
राजेंद्र की पत्नी लाडो (70), बेटे प्रवेश (33) और कमल (39), कमल की पत्नी आशु (35) और उनकी तीन बेटियां जिनकी उम्र 3, 6 और 15 साल थी। लाडो की बेटी हिमांशी (22) और बहू दीपिका (28) की भी मौत हो गई।

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