2026 वसंत पंचमी- हरिद्वार में गंगा स्नान करने घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, देव डोलियों ने भी किया स्नान

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ज वसंत पंचमी का गंगा स्नान पर्व है। तड़के से ही लोग स्नान के लिए हरकी पैड़ी समेत अन्य घाटों पर पहुंचने लगे। आस्था के साथ पहुंचे लोगों ने स्नान दान किया। देव डोलियां लेकर भी कई जगह से श्रद्धालु पहुंचे और देव डोलियों को गंगा स्नान कराया गया।

Vasant Panchami devotees arrived at Har Ki Pauri and other ghats in Haridwar to take a dip in Ganges River

हिंदू धर्म में कर्णछेदन को महत्वपूर्ण संस्कारों में माना गया है। ज्योतिषीय तिथियों के अनुसार वसंत पंचमी का दिन कर्णछेदन के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण रहते हैं जिसे देवताओं का काल कहा जाता है। उत्तरायण में किए गए संस्कार शुभ और दीर्घकालीन फल देने वाले माने जाते हैं। इसलिए वसंत पंचमी पर कर्णछेदन का प्रचलन बढ़ रहा है।

 

वसंत पंचमी का दिन माता सरस्वती का है। पंडित मोहन गैरोला का कहना है कि इस दिन विद्या आरंभ के साथ कर्णछेदन कराने से बालक की बुद्धि, विद्या और वाणी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मान्यता है कि कर्णछेदन से कानों की विशेष नाड़ियां जागृत होती हैं जिससे मस्तिष्क की ग्रहण क्षमता बढ़ती है। वह बताते हैं कि वसंत पंचमी स्वयं सिद्ध मुहूर्त है।

 

इस दिन किसी अलग शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती। इसी कारण बड़ी संख्या में अभिभावक इसी तिथि को अपने बच्चों का कर्णछेदन संस्कार कराते हैं। परंपरागत रूप से यह संस्कार उत्सव की तरह मनाया जाता था। पहले घरों में हवन-पूजन के बाद कर्णछेदन किया जाता था और रिश्तेदारों के साथ गांव या मोहल्ले में मिष्ठान वितरण किया जाता था।

 

समय के साथ इसका स्वरूप भले ही सीमित हुआ हो लेकिन आस्था और परंपरा आज भी कायम है। पंडित अभिषेक शर्मा का कहना है कि कर्णछेदन सूर्य की किरणों को भीतर प्रवेश कराकर तेजस्विता बढ़ाता है। इससे राहु-केतु जैसे ग्रहों के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

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सोने या चांदी के कुंडल पहनने से शरीर तेजस्वी बनता है। शास्त्रों के अनुसार जिस पुरुष का यह संस्कार नहीं होता, उसे श्राद्ध का अधिकारी नहीं माना जाता है।

 

सोना महंगा होने से चांदी को दी प्रमुखता

एक ज्वेलर्स के अजय बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले तक वसंत पंचमी पर कान छिदवाने के लिए गिनती के लोग ही आते थे लेकिन अब हर साल संख्या बढ़ रही है। एक-दो वर्षों से इस दिन बच्चों को लेकर बड़ी संख्या में अभिभावक दुकानों पर पहुंचते हैं। पहले कर्णछेदन के लिए चांदी के तार की मांग अधिक रहती थी। बच्चे को सोने की बाली या टॉप्स पहनाया जाता था मगर सोना महंगा होेने के कारण अब चांदी को लोग प्रमुखता दे रहे हैं। सुनीता यादव का कहना है कि उनकी बेटी की सात साल की है। पहले सोचा था कि कर्णछेदन के बाद सोने से टॉप्स या बाली पहनाएंगे लेकिन सोने के दाम बढ़ने के कारण अब चांदी का चयन किया है। आरोही बिष्ट का कहना है कि वसंत पंचमी पर घर में पूजा के बाद वो अपनी तीन माह की बेटी को लेकर जाएंगी और संस्कार पूरा करेंगी। इसके बाद मिठाई बांटी जाएगी।


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