2024 रक्षाबंधन- इस बार रक्षाबंधन पर दोपहर 1:30 तक रहेगा भद्रा का साया, जानिए राखी बांधने का क्या है मुहूर्त

2024 रक्षाबंधन- इस बार रक्षाबंधन पर दोपहर 1:30 तक रहेगा भद्रा का साया, जानिए राखी बांधने का क्या है मुहूर्त

कल रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार है। हिंदू धर्म में रक्षाबंधन के त्योहार का विशेष महत्व होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार हर वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा का साया रहेगा। ऐसी मान्यता है जब भी भद्रा होती है तो इस दौरान राखी बांधना शुभ नहीं होता है। राखी हमेशा भद्राकाल के बीत जाने के बाद ही बांधी जाती है।

राखी बांधने की सही विधि
भाई को राखी बांधने से पहले आप शुभ मुहूर्त के अनुसार थाली तैयार कर लें। थाली में राखी, अक्षत और मिठाई आदि सब रख लें। फिर भाई को तिलक लगाएं। इसके बाद अपने भाई के दाहिने कलाई पर राखी बांधें। इस दौरान राखी में तीन गांठ लगाएं। मान्यता है कि राखी की पहली गांठ को भाई की लंबी उम्र, दूसरी गांठ बहन की लंबी उम्र और तीसरी गांठ को रिश्तों की मजबूती के लिए बांधी जाती है। इसके बाद आप भाई को मिठाई खिलाएं। फिर सुख-समृद्धि की कामना करते हुए भाई की आरती उतारें।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
इस साल राखी बांधने का शुभ मुहूर्त दोपहर से शुरू होगा। ये समय 19 अगस्त के दिन दोपहर 01:30 से रात्रि 09:07 तक रहेगा। कुल मिलाकर शुभ मुहूर्त 07 घंटे 37 मिनट का रहेगा।

राखी शुभ मुहूर्त आरंभ – दोपहर 01:30 के बाद
शुभ मुहूर्त समापन- रात 09:07 तक

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भद्रा में क्यों नहीं बांधी जाती राखी
शास्त्रों के अनुसार जब भी रक्षाबंधन पर भद्रा काल रहता है तो उस समय तक राखी बांधना अशुभ होता है। ऐसे में भद्राकाल के दौरान राखी बांधना वर्जित होता है। भद्रा के शुरू होने से पहले या फिर भद्रा के खत्म होने के बाद ही राखी बांधी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य और पत्नी छाया की पुत्री व भगवान शनि की बहन हैं। भद्रा के जन्म लेते ही भद्रा बहुत ही उग्र स्वभाव की थीं। भद्रा यज्ञों में विघ्न-बाधा पहुंचाने लगी और मंगल कार्यों में उपद्रव करने लगी तथा सारे जगत को पीड़ा पहुंचाने लगी। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि रावण की बहन ने भद्रा काल में राखी बांधी थी जिस कारण से रावण का वध प्रभु राम के हाथों से हुआ था।

भद्रा काल
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में किसी भी तरह का शुभ कार्य को करने में शुभ मुहूर्त का विचार अवश्य ही किया जाता है। शुभ योग और शुभ मुहूर्त में किया जाने वाला कार्य हमेशा ही सफल माना जाता है जबकि अशुभ मुहूर्त में किया जाने वाला कार्य का प्रभाव नकारात्मक होता है। ज्योतिष में तिथि, वार, ग्रह और नक्षत्रों के योग से अलग-अलग तरह के योग बनत हैं। शुभ योग में अभिजीत मुहूर्त, सर्वार्थसिद्ध योग, रवि योग , पुष्य योग आते हैं जबकि अशुभ योग में राहु काल और भद्रा काल आदि का विचार किया जाता है।

जानें राखी बांधने का तरीका
सबसे पहले सुबह स्नान और पूजा पाठ करके राखी की तैयारियां करें, फिर बहन भगवान गणेश जी का ध्यान करते हुए भाई के माथे पर चंदन, कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं। फिर भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधे। इसके बाद भाई को नारियल देते हुए मिठाई खिलाएं और दीपक जलाकर आरती करें। अंत में अपने इष्ट देवी या देवता का स्मरण करते हुए भाई की सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए प्रार्थना करें।

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भाई न होने पर बहनें किसे बांधें रक्षासूत्र
रक्षाबंधन बहन-भाई के स्नेह और प्यार का त्योहार माना गया है। जिन बहनों के अगर कोई भाई नहीं तो वे अपने पिता, इष्टदेव और घर पर लगे किसी पेड़-पौधे को रक्षासूत्र बांध सकती हैं।

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