काल बना कोहरा: यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण हादसे में 20 लापता..मोबाइल-लगेज और पहचान के दस्तावेज तक सब खाक

Spread the love

मुना एक्सप्रेस वे पर हुए हादसे में कितनों ने अपनों को खोया है, यह बुधवार को भी साफ नहीं हो सका है। अब तक केवल तीन लोगों की ही शिनाख्त हो सकी है, जबकि 20 लोग अब भी लापता हैं। मोबाइल, लगेज और पहचान के दस्तावेज आग में जल जाने से परिजन असहाय होकर अपने अपनों की तलाश में भटक रहे हैं।

मंगलवार तड़के हुए हादसे के बाद से बसों में सफर कर रहे यात्रियों, गाड़ियों के चालक, परिचालक, क्लीनरों के परिवारीजन अस्पतालों, पोस्टमार्टम गृह और पुलिस कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन किसी के पास कोई पुख्ता जवाब नहीं है। मोबाइल बंद हैं, संपर्क के रास्ते टूट चुके हैं। आंखों में आंसू और चेहरे पर बेबसी लिए परिजन बस एक ही सवाल कर रहे हैं, हमारे अपने कहां हैं? बुधवार को पोस्टमार्टम गृह में 20 से अधिक परिजन जानकारी करने पहुंचे।

हमीरपुर के गुहांड निवासी ब्रजभाग सुबह 11 बजे अपने 28 वर्षीय बेटे देवेंद्र की तलाश में पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने बताया कि देवेंद्र सोमवार रात करीब आठ बजे नोएडा के लिए स्लीपर बस (यूपी 17 एटी 8577) से निकला था। मंगलवार रात नौ बजे तक बात हुई, फिर संपर्क टूट गया।

देवेंद्र परिवार का इकलौता कमाने वाला था, जिसकी शादी पिछले वर्ष फरवरी में हुई थी। फतेहपुर के राजकुमार अपने भाई नरेंद्र यादव को खोजते हुए पहुंचे। नरेंद्र नोएडा में हलवाई की दुकान पर काम करते थे। वह कानपुर के नौबस्ता से डबल डेकर बस में सवार हुए थे। रात दो बजे तक बात हुई, इसके बाद फोन स्विच ऑफ हो गया।

और पढ़े  राममंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट ने बैंक पर फोड़ा पूरा ठीकरा, खुद पर कोई सवाल नहीं, बच निकले मामले के बड़े आरोपी

संभल जिले के बहजोई निवासी जगदीश पाल अपने 30 वर्षीय बेटे पंकज कुमार की तलाश में पहुंचे। पंकज लक्ष्मी होलीडे कंपनी की डबल डेकर बस (एआर 11 डी 3100) से सवार थे, लेकिन दो दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। बांदा के राजीव अपने 15 वर्षीय भतीजे ऋषभ की तलाश में दो दिनों से भटक रहे हैं। ऋषभ लापता हैं, जबकि उनके पिता देवराज गंभीर हालत में एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं।

जिला बस्ती के रहने वाले दीपक पांडे अपने भाई ओंकार पांडे की तलाश में हैं, वहीं रजा हुसैन अपने भाई मोहम्मद सलीम को खोजते हुए पोस्टमार्टम गृह पहुंचे। परिजन का कहना है कि पुलिस और प्रशासन के पास फिलहाल कोई ठोस जानकारी नहीं है। न पहचान हो पा रही है, न यह बताया जा रहा है कि उनके अपने जीवित हैं या नहीं। हर गुजरते घंटे के साथ परिजन की पीड़ा और गहरी होती जा रही है। हादसे ने सिर्फ जिंदगियां नहीं छीनीं, कई घरों से चैन और नींद भी छीन ली है।

 

अनुज की तलाश में भाई 
कानपुर की सेवा ग्राम कालोनी गोविंद नगर निवासी अनुज श्रीवास्तव 32 पुत्र उमाकांत के भाई शुभम और उनके भाई की पत्नी पूजा श्रीवास्तव हादसे की सूचना के बाद उन्हें खोज रहे हैं। मगर अब तक उनका कुछ पता नहीं चल सका है।

 

रोडवेज बस चालक भी है लापता
टांडवा जलाल आंबेडकर नगर के रहने वाले सुनील कुमार पुत्र रामलाल जो कि रोडवेज बस चालक थे। आंबेडकरनगर की डिपो बस को लेकर दिल्ली आ रहे थे। परिवहन निगम के अधिकारियों के साथ उनके परिजन खोज रहे हैं। उनके साथ अन्य चालक रामअवध राम और परिचालक गिरीश मिश्रा घायल हैं।

और पढ़े  अयोध्या:आज राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक, नई व्यवस्थाओं पर होगा मंथन; खाली पदों पर फैसला संभव

 

खोजने पर भी भाई नहीं मिला
बस के परिचालक धौलपुर के बाड़ी निवासी भोलू से एक रात पहले भाई की बातें हुई थीं। सुबह घटना की सूचना मिलने पर वह मौके पर पहुंचे तो मुलाकात तो दूर की बात खोजने पर भी भाई नहीं मिला। शाहरुख ने बताया बहन सितारा व मौसा जहूर रहमान गाड़ी व अस्पताल में खोजते रहे पर वे नहीं मिले।

 

 

अपनों की पहचान के लिए सब्र का इम्तिहान
हादसे में मृत लोगों में से अपनों की पहचान के लिए पीड़ितों को सब्र का इम्तिहान देना होगा। पहचान के लिए एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ेगा। शवों की स्थिति ऐसी है कि शिनाख्त करना मुश्किल हो गया है, इसलिए डीएनए का सहारा लिया जा रहा है। 11 लोगों की डीएनए सैंपलिंग हो गई। शिनाख्त की प्रक्रिया के दूसरे दिन भी अस्पताल व पोस्टमार्टम के बाहर गहमागहमी का माहौल रहा।

प्रशासन द्वारा गठित विशेष टीम ने अवशेषों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए परिजन के रक्त के नमूने लिए। पहले दिन सात लोगों के सैंपल लिए गए जबकि दूसरे दिन बुधवार को चार अन्य परिजन ने भी अपने डीएनए सैंपल दिए हैं। अब तक कुल 11 लोगों के सैंपल फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किए जा चुके हैं।

चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, डीएनए मिलान की प्रक्रिया संवेदनशील और समय लेने वाली होती है। सैंपल को जांच के लिए आगरा स्थित लैब भेजा गया है। यह प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा।

 

 

परिजन बोले-एक सप्ताह का समय एक सदी जैसे
परिजन अपनों के अवशेष पाने की आस में पोस्टमार्टम हाउस व जिला अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। कानपुर के फतेहपुर से आए नरेंद्र यादव ने बताया, हमें बस हमारे अपने का शरीर मिल जाए, ताकि हम सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर सकें। यह एक हफ्ता हमारे लिए एक सदी जैसा होगा।

और पढ़े  राममंदिर चढ़ावा चोरी: चढ़ावा चोरी की रकम से लखनऊ में खरीदी गईं बेशकीमती संपत्तियां, इन 8 आरोपियों की हो रही जांच

 

रोजगार की तलाश में थे… घायल होकर अस्पताल में पहुंचे
मंगलवार सुबह सड़क हादसे में शामिल घायलों में अधिकांशतः बुंदेलखंड क्षेत्र के लोग थे। ये सभी रोजगार की तलाश में दिल्ली, गुड़गांव और नोयडा जा रहे थे। इन्हीं घायलों में एक ही परिवार के तीन लोग शामिल हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। बलदेव में हुए भीषण सड़क हादसे में घायलों की संख्या सैकड़ा तक पहुंच गई।

 

इस हादसे में शामिल एक स्लीपर कोच में सवार हमीरपुर के बिलगांव निवासी भारत अपने साथ मनीष, मोहित और आशिष आदि भतीजों को लेकर हमीरपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। मंगलवार सुबह सबेरे हुए सड़क हादसे में भारत, मनीष और मोहित घायल हो गए।


Spread the love
  • Related Posts

    26 जुलाई का सार्वजनिक अवकाश रद्द, आगरा दौरे पर CM योगी, 53 परियोजनाओं को देंगे हरी झंडी

    Spread the love

    Spread the loveमुख्यमंत्री आदित्यनाथ 25 और 26 जुलाई को दो दिवसीय आगरा दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आगरा में वह 421.01 करोड़ रुपये की 53 विकास परियोजनाओं…


    Spread the love

    सबसे उम्रदराज सपा विधायक आलमबदी का निधन, 92 साल की उम्र में कहा अलविदा, आजमगढ़ की इस सीट से 5 बार जीते

    Spread the love

    Spread the loveउत्तरप्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है। समाजवादी पार्टी के एक कद्दावर नेता और आजमगढ़ जिले की निजामाबाद सीट से पांच बार विधायक…


    Spread the love