140 परिवार होंगे ‘घर’ से ‘बेघर’: – ग्रीन व्यू सोसाइटी के फ्लैट नही है सुरक्षित,1 मार्च तक खाली करने होंगे फ्लैट।।

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सेक्टर 37 डी स्थित ग्रीन व्यू सोसाइटी में रह रहे 140 परिवारों को एक मार्च तक अपने घरों को खाली करना होगा। सोसाइटी का 2017 में निर्माण करने वाली नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) ने अपने खर्चे पर इन परिवारों को वैकल्पिक आवासों में शिफ्ट करने का विकल्प भी दिया है। जो फ्लैट मालिक अपना पैसा वापस लेना चाहते हैं, उन्हें एक महीने के अंदर ब्याज सहित पैसा वापस मिलेगा। नगर योजनाकार निदेशालय ने सोसाइटी के फ्लैटों को रहने के लिए असुरक्षित करार दिया है। उसी के बाद उन्हें  खाली कराने के निर्देश जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के चेयरमैन को दिए गए थे।
इस संबंध में बुधवार को जिला प्रशासन और एनबीसीसी के अधिकारियों के साथ सोसाइटी में रहने वाले लोगों की बैठक हुई। बैठक में तय हुआ कि अगर कोई फ्लैट मालिक किराए पर रहना चाहता है तो मौजूदा फ्लैट के आकार का मकान किराए पर ले सकता है। उसका किराया भी एनबीसीसी देगा। लघु सचिवालय में हुई बैठक में उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने स्पष्ट किया कि फ्लैटों का स्वामित्व रेजिडेंट्स का ही रहेगा। बगैर फ्लैट मालिकों को वाजिब मुआवजा दिए किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट आने पर अगर बिल्डिंग की रिपेयर के बाद एनबीसीसी यहां रहने वालों को सेफ्टी सर्टिफिकेट देता है तो जो लोग वहां रहना चाहते हैं, वह रह सकते हैं। जो रिफंड चाहेंगे उन्हें रिफंड मिल जाएगा, लेकिन अभी सभी को सोसाइटी खाली करनी होगी।
उपायुक्त ने कहा कि इस मामले में गलती एनबीसीसी और ठेकेदार की है। बिल्डिंग के ढांचे के बारे में आईआईटी दिल्ली के द्वारा दी गई रिपोर्ट यहां रहने वालों के साथ साझा की जाएगी। सीपीआरआई और आईआईटी रुड़की के चार सदस्यों की दूसरी नई एक्सपर्ट कमेटी बनी है। वह बिल्डिंग का सेफ्टी ऑडिट करने के दौरान रेजिडेंट्स के प्रतिनिधियों से भी बात करेगी। बैठक में एनबीसीसी के सीएमडी पीके गुप्ता, सीजीएम नोमान अहमद मौजूद थे। रेजिडेंट्स का पक्ष सुनने के बाद पीके गुप्ता ने कहा कि फ्लैट्स एनबीसीसी ने बनवाए हैं, इसलिए वह दोषी है। शुरू में वह हैरान थे कि ऐसा क्यों हो रहा है। बिल्डिंग के बाहरी हिस्से में दरारें क्यों आ रही हैं। 

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फ्लोराइड युक्त पानी ने इमारतों को कमजोर किया
आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों की जांच में खुलासा हुआ है कि ग्रीन ब्यू सोसाइटी के पानी में क्लोराइड की मात्रा बहुत अधिक होने के कारण सरिया में जंग लग चुकी है। नींव से लेकर दीवार तक क्लोराइड युक्त पानी से हुए निर्माण के कारण  अंदर तक का ढांचा कमजोर हो चुका है। जिससे अंदर से लेकर बाहर तक इमारतों में कई जगह बड़ी बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। प्लास्टर झड़ रहा है। इसलिए अब इसमें रहना सुरक्षित नहीं है। कभी भी कोई हादसा हो सकता है। इसके बाद एक चार सदस्यीय टीम ने भी जांच की है। जिसकी रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है।

यह खुलासा14 फरवरी को एनबीसीसी के दिल्ली मुख्यालय में बोर्ड आफ डायरेक्टर की बैठक हुआ। उसी के बाद जिला नगर योजनाकार विभाग के निदेशक मकरंद पांडुरंग ने ग्रीन व्यू सोसाइटी के फ्लैटों को खाली कराने की सिफारिश की थी।


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