पौड़ी गढ़वाल : जिलाधिकारी ने किया काष्ठ कला प्रशिक्षण कार्यक्रमका शुभारंभ।

Spread the love

जिलाधिकारी डॉ0 विजय कुमार जोगदण्डे ने श्रीनगर बद्रीनाथ रोड़ स्थित एक होटल में काष्ठ कला प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत हैंड होल्डिंग सपोर्ट कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बनाये जा रहे उत्पादों को ऑनलाइन माध्यम से बिक्री कर अधिक लाभ कमाया जा सकता है। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद के प्राचीन धार्मिक स्थलों एवं मंदिरों को भी काष्ठ कला से बनाकर प्रचारित-प्रसारित करें। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने वाले गणमान्य अतिथियों को गुलदस्तों के स्थान पर हस्तशिल्प से बने उत्पाद प्रतीकचिन्ह के रूप में दें। श्रीनगर, पौड़ी एवं कोटद्वार में स्कूल का चयन कर, अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को काष्ठ कला के बारे में उत्सुकता को उजागर करते हुए उनमें क्रिएटिव कार्य करने की क्षमता को विकसित करें। जिलाधिकारी ने हस्तशिल्पि द्वारा बनाये गये, मंदिरों के शिल्प/मॉडल का अवलोकन कर, उनके कार्य के बारे में जानकारी ली। उत्तराखंड हथकरघा परिषद के तत्वाधान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 20 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया तथा प्रशिक्षण को पूर्ण कर हस्तशिल्प कला की बारीकियों को सीखा।
जिलाधिकारी डॉ जोगदण्डे ने कहा कि जनपद में पहली बार हस्थशिल्प कला की प्रदर्शनी हो रही है, जो कि इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कहा कि भारत सरकार का हस्थशिल्प व हस्थकला को बढ़ावा देने मे विशेष प्रयास है। उन्होंने कहा कि उत्पाद को बनाना ही महत्वपूर्ण नही है बल्कि उसकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग भी अच्छी होनी चाहिये, जिलाधिकारी ने कहा कि पारंपरिक काष्ठ शिल्प कला का प्रचार-प्रसार व बच्चों को इस ओर आकर्षित करने के लिए स्कूली बच्चों के समक्ष प्रदर्शनी लगाये, जिससे उनके मन में काष्ठकला के प्रति रुचि उत्पन्न होगी। कहा कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार के द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री स्वरोजगार सृजन योजना आदि जिसमे सरकार द्वारा ऋण देने के साथ अनुदान भी दिया जाता है। कहा कि उद्योग लगाने में बैंकों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है, इसलिए बैंकों से समन्वय स्थापित कर आगे बढ़ना चाहिए, ।
मुख्य विकास अधिकारी प्रशांत कुमार आर्य ने कहा कि हाथ से बने उत्पादों की मांग भले ही कम हो लेकिन इसके खरीदार ऊंची कीमत देने के लिए हमेशा तैयार रहते है। हस्तशिल्प कला से बने उत्पादों का एक अलग बाजार होता है, लेकिन इन उत्पादों को उस बाजार तक कैसे पहुंचाना है, इस पर कार्य किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इस कार्य में आपका पूर्ण सहयोग करेगा और आपको बाजार उपलब्ध करायेगा।

और पढ़े  हरिद्वार- मनसा देवी मंदिर मामला, मंदिर से हटाए जाएंगे महिलाओं को स्पर्श कर आशीर्वाद देने वाले पुजारी

Spread the love
  • Related Posts

    देहरादून- चुनावी पिच पर छोटी टीम को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी, प्रदेश प्रभारी कर सकती हैं पीसीसी की घोषणा

    Spread the love

    Spread the loveकांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए छोटी टीम को बड़ी जिम्मेदारी देगी। प्रदेश कांग्रेस की ओर से नई कार्यकारिणी के लिए भेजी गई नामों की सूची के…


    Spread the love

    देहरादून- जंगल की आग की हो चुकीं 575 घटनाएं, वन महकमा 30 तक देखेगा हालात, फिर फायर सीजन पर लेगा फैसला

    Spread the love

    Spread the loveवन महकमे का फायर सीजन पुरानी व्यवस्था के तहत 15 जून को पूरा हो जाता है पर वनाग्नि के दृष्टिगत 30 जून के बाद हालात को देखते हुए…


    Spread the love

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *