खगोलविदों के अनुसार चंद्रग्रहण केवल एक दृश्य नहीं है, बल्कि यह चंद्रमा के वायुमंडल और थर्मल व्यवहार के अध्ययन का बड़ा अवसर होता है। ग्रहण में जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो वहां के तापमान में गिरावट आती है। इस बदलाव से चंद्रमा पर मौजूद धूल व चट्टानों की प्रकृति को समझने में वैज्ञानिकों को मदद मिलती है।
भारत में यह चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को सुबह 6:53 बजे शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगा। चंद्रग्रहण भारत में अदृश्य है, इसलिए यहां सूतक काल के नियम लागू ने होंगे, बहनें पूरे दिन भाइयों को राखी बांध सकेंगी।
यह ग्रहण मुख्य रूप से साउथ अमेरिकन रीजन में दिखेगा। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों व शोधकर्ताओं के लिए संस्थान व्यवस्था कर रहा है।
-डॉ. वीरेंद्र यादव, केंद्र प्रभारी, एरीज