हालांकि उनका कहना है कि मसूरी और धर्मपुर में वैकेंसी नहीं है लेकिन भाजपा अगर उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी तो गुरेज भी नहीं है। उनका कहना है कि मसूरी विधानसभा मेरे लिए नई नहीं है वहां मेरा घर रहा है। दिनेश अग्रवाल ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कांग्रेस से हुए मोहभंग के कारण भी बताएं और भाजपा में आने के बाद नेताओं और पार्टी की कार्यशैली में अंतर क्या है, इसका उल्लेख भी किया।
कांग्रेस में सम्मान की संस्कृति हो गई थी खत्म
उन्होंने बताया कि 1968 में कांग्रेस में शामिल हुआ और लगभग 55 साल पार्टी के लिए काम किया। कहते हैं कि हमने पार्टी को इतने साल दिए तो पार्टी ने भी बहुत कुछ दिया। कहा, मेरा कांग्रेस से मोहभंग कई कारणों से हुआ। पार्टी में परिवारवाद हावी हो गया। कुछ लोगों ने किसी का भी लिहाज करना बंद कर दिया था।
शीर्ष नेतृत्व से मिलने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, कोई सुनता नहीं था। दूसरी ओर मैंने व्यक्तिगत तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व को देखा, उनकी कार्यक्षमता और व्यक्ति को पहचानने की क्षमता ने मुझे प्रभावित किया। कांग्रेस में सम्मान की संस्कृति खत्म हो गई थी। देहरादून में भी नेतृत्व की स्थिति कमजोर हो गई थी। वहीं, वर्तमान में कांग्रेस के प्रदर्शन पर अग्रवाल का कहना है कि कुछ नेता कांग्रेस छोड़कर गए फिर लौट आए और फिर उन्हें ही जिम्मेदारी सौंप दी गई।