ओलंपिक के बाद अब सभी निगाह टोक्यो में होने वाले पैरालंपिक खेलों पर लगी हैं। इन खेलों में भाग लेने वाले विशेष क्षमता वाले खिलाड़ी अपने जज्बे और संकल्प से बड़ी प्रेरणा के सबब हैं। जिंदगी के इन असल चैंपियनों ने पहले भी दिखाया है कि वो किसी से कम नहीं और इस बार इस बार तैयारी नया इतिहास रचने की है। पिछली बार रियो खेलों में हमने दो स्वर्ण सहित चार पदक जीतकर अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया था, इस बार उम्मीदें इतिहास रचने की है।
ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बाद पैरालंपिक खेलों में 54 खिलाड़ियों के दल से भी पहली बार दोहरे अंकों में पदक की उम्मीद की जा रही है। भारत ने ओलंपिक में एक स्वर्ण और दो रजत सहित कुल सात पदक जीते थे। भारतीय पैरालंपिक समिति को पैरा खिलाड़ियों से कम से कम 10 पदक की उम्मीद है। भारत पैरालंपिक में नौ खेलों में हिस्सा लेगा। भारतीय खिलाड़ियों से अभूतपूर्व सफलता की उम्मीद करना बेमानी नहीं होगा क्योंकि विश्व रैंकिंग में कम से कम चार भारतीय नंबर एक पर काबिज हैं जबकि छह खिलाड़ियों की विश्व रैंकिंग दूसरी है। इसके अलावा लगभग 10 खिलाड़ी विश्व रैंकिंग में शीर्ष तीन में शामिल हैं। कोविड-19 महामारी के कारण पैरालंपिक का आयोजन कड़े सुरक्षा और स्वास्थ्य नियमों के बीच हो रहा है। पैरा खिलाड़ियों को उनकी दिव्यांगता के प्रकार और सीमा के आधार पर अलग-अलग वर्ग में रखा जाता है। इससे उन्हें समान दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा पेश करने का मौका मिलता है।







