नैनीताल/ हल्द्वानी : भारतीय जनता पार्टी के महिला कार्यकर्ताओं ने किया बृक्षारोपण।

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उत्तराखंड की धरती पर ऋतुओं के अनुसार कई अनेक पर्व मनाए जाते हैं । यह पर्व हमारी संस्कृति को उजागर करते हैं , वहीं पहाड़ की परंपराओं को भी कायम रखे हुए, इन्हीं खास पर्वो में शामिल,  हरेला   उत्तराखंड में एक लोकपर्व है| हरेला शब्द का तात्पर्य हरयाली से हैं|  यह पर्व वर्ष में तीन बार आता हैं| पहला चैत मास में दूसरा श्रावण मास में तथा तीसरा व् वर्ष का आखिरी पर्व हरेला आश्विन मास में मनाया जाता हैं .चैत्र मास में – प्रथम दिन बोया जाता है तथा नवमी को काटा जाता है।श्रावण मास में – सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में बोया जाता है और दस दिन बाद श्रावण के प्रथम दिन काटा जाता है। आश्विन मास में – आश्विन मास में नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है और दशहरा के दिन काटा जाता है।
उत्तराखंड के लोगो द्वारा श्रावण मास में पढने वाले हरेले को अधिक महत्व दिया जाता हैं  क्योंकि श्रावण मास शंकर भगवान जी को विशेष प्रिय है। सावन लगने से नौ दिन पहले पांच या सात प्रकार के अनाज के बीज एक रिंगाल को छोटी टोकरी में मिटटी डाल के बोई जाती हैं| इसे सूर्य की सीधी रोशनी से बचाया जाता है और प्रतिदिन सुबह पानी से सींचा जाता है। 9 वें दिन इनकी पाती की टहनी से गुड़ाई की जाती है और दसवें यानि कि हरेला के दिन इसे काटा जाता है। और विधि अनुसार घर के बुजुर्ग सुबह पूजा-पाठ करके हरेले को देवताओं को चढ़ाते हैं| उसके बाद घर के सभी सदस्यों को हरेला लगाया जाता हैं

#हरेला सिर्फ एक त्यौहार ना होकर #उत्तराखंड की जीवनशैली का प्रतिबिंब है। यह प्रकृति के साथ संतुलन साधने वाला त्योहार है। प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन हमेशा से पहाड़ की परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए आज बूथ 133में बृक्षारोपण किया गया पूर्वी मंडल वार्ड 57 पार्षद दिनेश सिंह जी बूथ अध्यक्ष गोविंद सुपियाल तथा भारतीय जनता पार्टी के महिला कार्यकर्ताओं ने बृक्षारोपण किया गया।
पूर्वी मंडल महिला मोर्चा मंडल मंडल अध्यक्ष #रुकमणी बिष्ट

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