नैनीताल / हल्द्वानी : भाजपा अधिकारियों के उत्पीड़न से परेशान होकर दिया इस्तीफा – नवीन पंत

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बगैर मण्डल अध्यक्ष के संज्ञान के मण्डल मैं नामित पार्षदों की नियुक्ति और कुछ मण्डल पदाधिकारियों की विभागीय समिति मैं नियुक्ति होना ।
 बगैर मण्डल अध्यक्ष के संज्ञान के मेयर जोगेंद्र रौतेला जी द्वारा मण्डल के बिभिन्न वार्डों मैं मण्डल के कुछ पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं संग गुपचुप बैठक करना,वार्डों मैं कुछ जगहों पर उद्घाटन ,शिलान्याश के दौरान सिर्फ मण्डल अध्यक्ष को सूचना न करना एवं पदाधिकारियों के वार्डों मैं टूटी सडकों एव नालियों के निर्माण को बार बार अनुरोध करने के बाद भी न बनवाना और किसी न किसी बहाने से उसे टालना ।
 मेयर साहब का अपने मण्डल मैं कोई सहयोग न देना और अपना अलग गुट बनाकर काम करना, और जो लोग पार्टी के खिलाफ और अपने संगठन को पार्टी और संघ बनाने की बात करते हैं उन्हें संरक्षण देकर गुटबाजी करवाना और यह कह देना कि ये लोग मुझे जिताने वाले हैं मुझे छोड़ कर दूसरी पार्टी मैं चले जायंगे । और तो और उनका शिकायती पत्र लेकर देहरादून जाकर उच्च पदाधिकारियों से मिलकर गुटबाजी को बढावा देना और मण्डल मैं निराशा का वातावरण उत्पन्न करना ।

 सबसे ज्यादा तकलीफ जिला महामंत्री के मण्डल मैं अनावश्यक हस्तक्षेप से हुई । जिनका लगातार किसी न किसी रूप मैं मण्डल को परेशान करने की योजना रही, जैसा कि कुछ दिन पूर्व प्रदेश कार्यालय सचिव कौस्तुभानन्द जोशी ने फ़ोन कर मुझसे कहा की आप लोगों के साथ चाय पीनी है मैंने कहा ठीक है पर चाय के दौरान उन्होंने प्रदीप जनोटी को फ़ोन कर बुलाया और बोले मैं पदाधिकारियों की बैठक लेने आया हूँ और चाय पीने के दौरान प्रदीप जनोटी द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि हमारे तरीके से काम नहीं करने पर मण्डल भंग कर दिया जायेगा । साथ ही यह भी कहा गया की कार्यालय सचिव आये थे तो आपको उनके साथ सारे पदाधिकारियों और मोर्चे के अध्यक्ष एव महामंत्री को बुलाना चाहिए उनको बैठक लेने का अधिकार है ऐसा कह कर मण्डल अध्यक्ष पर दबाव की पॉलिटिक्स करने लगे, साथ ही चर्चा के दौरान उन्होंने कहा की आपका उत्तरी मण्डल भाजपा कुमाँऊ संभाग कार्यालय मैं बैठक या कोई कार्यक्रम नहीं कर सकता है, इसके लिए तुमें मुझसे विशेष अनुमति लेनी होगी। साथ ही यह भी कहा की मोर्चे स्वतंत्र बिंग है और उन्हें भाजपा से हटकर काम करना चाहिए क्या हमें आगे कार्यकर्ता नहीं चहिये ऐसा कह कर मण्डल अध्यक्ष के सामने महिला मोर्चे को भाजपा से अलग हटकर काम करने को कहा, जिससे साफ साफ यह प्रतीत होता था कि कैसे मण्डल मैं कार्य को बिगाड़ने की योजना रचना तय की जा रही थी। जबकि मोचों को मण्डल अध्यक्ष के संज्ञान के साथ मण्डल मैं कार्य करने चाहिए ।
 इसके अलावा जिला महामंत्री प्रदीप जनोटी द्वारा युवा मोर्चा का जिला प्रभारी होने का दबाव युवा मोर्चे के नगर की टीम बनाने मैं करना और संघ के बड़े पदाधिकारी का नाम लेकर दबाव बनाना । साथ ही साथ जिला महामंत्री प्रदीप जनोटी द्वारा स्वयं को पार्टी बताना और कहना की पार्टी कौन है, मैं पार्टी हूँ, और मुझे देहरादून से कहा गया है कि तुम अगले जिलाध्यक्ष हो, आगे कहा अभी जिलाध्यक्ष तो अपने विधानसभा के चुनाव मैं व्यस्थ है उन्होंने मुझसे कहा है की तुम देखो मंडलों को और जैसे चाहो निपटा लो इसी लिए मैंने पूर्वी मण्डल हल्द्वानी को भंग कर वहां संयोजक नियुक्त करने की योजना बनाई हूँ ।
 निवर्तमान मण्डल महामंत्री ज्ञानेंद्र जोशी को जब अनुशासनात्मक कार्यवाही का नोटिस दिया गया तब भी मण्डल अध्यक्ष को संज्ञान मैं नहीं लिया गया और उस पर एकतरफा कार्यवाही कर जाँच तक पद मुक्त का नोटिस थमा दिया गया । और अब नया महामंत्री बनाने का दबाव डाला जा रहा है। मेरे द्वारा मण्डल प्रभारी संजीव शर्मा को जब पूछा गया कि जाँच का क्या हुआ और क्या ज्ञानेंद्र जोशी को दोषी पाए जाने का कोई पत्र दिया जायेगा, तो कह दिया गया कि कहाँ जाँच होती है आप तो पार्टी को जानते ही हो बस जाँच हो गयी समझो और नया महामंत्री जिसे कैप्टन (जिलाध्यक्ष ) चाहते है उसे बनाओ ।
 मण्डल प्रभारी संजीव शर्मा जी को मण्डल मैं हो रही घटनाओं के बारे मैं बार बार बताया गया पर प्रभारी द्वारा कोई कार्यवाही नही की गयी,मिलने की बात कह कर बार बार टला जाता रहा,जिससे कही न कही पीड़ा बड़ी ।
 जिलाध्यक्ष पूर्ण रूप से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी मैं लगे हैं उन्हें किसी से मिलने का समय नहीं है जब भी संगठन से सम्बंधित समस्या को लेकर बात करने पर बस इतना ही सुनने को मिलता है कि राजनीति मैं सब चलता है ऐसा कह कर टाल दिया जाता है । जिससे गुटबाजी को बढ़ावा मिलाता है और समर्पित कार्यकर्ताओं मैं आक्रोश पनपता है ।
 एक वाकिया युवामोर्चा मैं जिला पदाधिकारी के बनने पर जिसे मण्डल द्वारा पैनल पैर नहीं भेजा गया क्योंकि वह मण्डल के किसी कार्यक्रम मैं भाग नहीं लेता था जिलाध्यक्ष जी से इस विषय को लेकर विरोध प्रकट किया गया तो मुझे चुप करा दिया गया और कहा की कुछ निर्णय न चाहते हुए भी करने पड़ते है वो पदाधिकारी बनाने के बाद भी कार्यक्रम मैं नहीं आता है और गुटबाजी वाले लोगों के साथ कार्यक्रम करता है उसे जिला महामंत्री प्रदीप जनोटी का संरक्षण प्राप्त है इन्ही चीजों से गुटबाजी होती हैं । ये संगठन की व्यवस्था मैं मुझे अलग थलग कर सब कुछ अपने हाथ मैं लेकर खुद लेना चाहते थे जो मुझे बर्दास्त नहीं हुआ जो स्वाभिमान पर कुठाराघात है ।
 हमारे मण्डल के कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को जो पार्टी संगठन को हर समय सहयोग करते है जिलाध्यक्ष को बार बार बताने के बाद भी उनको नजरंदाज किया गया, और उन्हें हाशिये पर डाल दिया गया ।

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 इस्तीफा देने के बाद अभी तक किसी ने हमारे बात को सुना नहीं केवल शनिवार को जिला प्रभारी खिलेंद्र सिंह चौधरी ने कार्यालय मैं मिलाने को बुलाया मैं मेरे महामंत्री दिशांत टंडन,कोषाध्यक्ष उमेश सैनी और महिला मोर्चा की अध्यक्ष दीप्ति चुफाल मिलने पहुचे तो वहां पर मेने देखा की प्रदीप जनोटी पहले से ही मौजूद थे मुझे उनके साथ बैठ कर समस्या बताने को कहा जिसे मैंने मना कर दिया और प्रदीप जनोटी के कमरे से बाहर जाने पर ही बात करने को कहा उसके बाद जब बात हुई तो उन्होंने कहा की मैं जल्दी मैं हूँ आप संशेप मैं 10 – 15 मिनट मैं बतायें, मैंने फिर कहा की आप नोट कर लें लेकिन उन्होंने मेरे बात को औपचारिकता मात्र सुना और किसी पदाधिकारियों की बात को न सुन उठ कर चले गए और मेरे मण्डल मैं अन्यत्र जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट,जिला महामंत्री प्रदीप जनोटी के साथ बैठक करने चले गए इससे साफ यह जाहिर होता है कि किसके इशारे पर सारा कार्य हो रहा है और किस तरीके की गुटबाजी शहर मैं हावी है ।
 हमारे पार्टी मैं लोकतंत्र है इसी के तहत हल्द्वानी उत्तरी मण्डल 2022 विधानसभा को जीतने के लक्ष के साथ आगे बढ़ रहा था पर कुछ कथाकथित लोगों को यह रास नहीं आया ।उन्होंने मण्डल मैं गुटबाजी को बढावा दिया नतीजन मुझे इस्तीफा देना पड़ा ।
 हम ऐसा मानते हैं हम पार्टी के कर्मठ हम पार्टी मैं थे, हैं, और रहेंगे और जहाँ पार्टी के साथ धोखेबाजी होती है तो हम स्वाभिमान को बेच कर कम नहीं कर सकते हैं।

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