Noida- नोएडा बवाल में RJD की प्रियंका भारती और कंचना यादव का नाम, क्यों फंस गईं? दोनों पर FIR दर्ज

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नोएडा की साइबर थाना पुलिस ने सोशल मीडिया पर फर्जी और भड़काऊ वीडियो प्रसारित कर सार्वजनिक शांति भंग करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय जनता दल की प्रवक्ता प्रियंका भारती और कांचाना यादव सहित कई के खिलाफ गौतम बुद्ध नगर साइबर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। यह घटना बुधवार को सामने आई, जब अधिकारियों ने मामले की जानकारी दी।

यह आरोप लगाया गया है कि RJD नेताओं ने मध्य प्रदेश की एक घटना, जिसमें एक व्यक्ति को पुलिस ने पीटा था, को नोएडा में चल रहे श्रम विरोध प्रदर्शनों से जोड़ा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस मामले को पोस्ट कर उन्होंने कथित तौर पर तनाव भड़काने की कोशिश की।

पुलिस ने ‘X’ हैंडल @ItsKtyni और जितेंद्र शर्मा दौसा नामक फेसबुक प्रोफाइल के खिलाफ भी FIR दर्ज की है। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने मध्य प्रदेश का एक वीडियो साझा किया, जबकि वे यह दावा कर रहे थे कि यह घटना नोएडा में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, सभी आरोपियों पर नोएडा में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान अफवाहें फैलाने का प्रयास करने का आरोप है।

नोएडा में विरोध प्रदर्शन
नोएडा में सोमवार को हजारों की संख्या में फैक्ट्री मजदूरों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगों को लेकर हड़ताल की थी। प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर हिंसा भड़क उठी, जिसके चलते आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। पुलिस द्वारा विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की कुछ हलकों में आलोचना भी हुई है, हालांकि पुलिस का कहना है कि “मामूली बल” का प्रयोग किया गया था।
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सोशल मीडिया पर वीडियो का प्रयोग
इस घटना के बाद, RJD प्रवक्ताओं यादव और भारती ने सोशल मीडिया पर उस व्यक्ति का वीडियो साझा किया जिसे पुलिस ने पीटा था और सार्वजनिक रूप से पुलिस की आलोचना की थी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बताया कि जितेंद्र कुमार दौसा द्वारा फेसबुक पर पोस्ट किया गया वीडियो वास्तव में मध्य प्रदेश के शहडोल से था, जहाँ एक शराबी व्यक्ति सार्वजनिक उपद्रव पैदा कर रहा था। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों ने इस वीडियो को इस झूठे दावे के साथ साझा किया कि यह नोएडा में हो रही घटनाओं को दर्शाता है, साथ ही भ्रामक कैप्शन भी दिए।

डिजिटल ट्रेल की जांच से हिंसा फैलाने वालों की होगी पहचान
नोएडा शहर में हिंसक हुए श्रमिकों के प्रदर्शन के पीछे बाहरी लोगों के हाथ होने की जानकारी सामने आई है। इसमें कुछ संगठनों को भी चिन्हित किया गया है। अब हिंसा फैलाने वालों की पहचान के लिए एसटीएफ डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है। इससे पता चलेगा कि अफवाह व हिंसा फैलाने की शुरुआत सोशल मीडिया से हुई या व्हॉट्सएप ग्रुप से । एसटीएफ की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है।

चार दिनों से नोएडा में शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था। रविवार को शांति रही और अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई। सोमवार को अचानक नोएडा में प्रदर्शन उग्र हो गया और देखते ही देखते हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने 300 से अधिक कंपनियों में तोड़फोड़ कर दी।

पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि हिंसक प्रदर्शन के एक दिन पहले 140 के आसपास व्हाट्सएप ग्रुप व एक्स हैंडल बनाए गए। रविवार को ही 50 संदिग्ध एक्स हैंडल बनाए गए। एसटीएफ अधिकारियों ने इन सभी ग्रुप के एडमिन व हैंडलर की जानकारी एकत्र करना शुरू कर दिया है।

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इसमें सबसे अहम तथ डिजिटल ट्रेल की जांच है। डिजिटल ट्रेल के तहत इंटरनेट का इस्तेमाल करने के दौरान वेबसाइट विजिट, सोशल मीडिया पोस्ट, सर्च हिस्ट्री समेत अन्य जानकारी एटीएस जुटा रही है।

डिजिटल ट्रेल से मिलती है जनकारी
दरअसल, डिजिटल ट्रेल ऑनलाइन गतिविधियों का एक स्थायी रिकॉर्ड है, जो यह बताता है कि आप ऑनलाइन क्या करते हैं और कहां जाते हैं। डिजिटल ट्रेल से यह स्पष्ट होगा कि आपने कब कहां सोशल मीडिया पोस्ट किया है।

यह डाला यूजर्स के जानकारी के बिना एकत्र किया जाता है। एक बार डिजिटल रूप से दर्ज होने के बाद, इन निशान को मिटाना मुश्किल हो सकता है। इस जानकारी के लिए एसटीएफ फॉरेंसिक लैब का भी सहारा लेगी।

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