कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा जिनके घर से मिली करोड़ों की नकदी, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कार्रवाई की, पढ़ें इनका वर्तमान और भूत

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सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ एक रिपोर्ट आने के बाद उन्हें उनके मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र सरकार को उनके स्थानांतरण की सिफारिशें कीं। न्यायमूर्ति वर्मा ने अक्तूबर 2021 में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।

घर में लगी आग और फूट गया भांडा
पिछले हफ्ते होली की छुट्टियों के दौरान उनके सरकारी बंगले में बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिलने के बाद यह फैसला लिया गया। यह धनराशि उस समय मिली जब इमारत में आग लग गई और न्यायाधीश के परिवार के सदस्यों ने- जो उस समय शहर में नहीं थे- आपातकालीन सेवाओं को फोन किया। उन्होंने फिर पुलिस को बुलाया।

 

कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?
जस्टिस यशवंत वर्मा का जन्म 6 जनवरी 1969 को इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बी.कॉम (ऑनर्स) की पढ़ाई की और मध्य प्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में उन्होंने कॉर्पोरेट कानूनों, कराधान और कानून की संबद्ध शाखाओं के अलावा संवैधानिक, श्रम और औद्योगिक विधानों के मामलों में भी वकालत की।

2016 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में ली शपथ 
56 वर्षीय न्यायाधीश, जो 1992 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए थे, उन्हें 13 अक्टूबर 2014 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और उन्होंने 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

कई पदों पर रहे
वह 2006 से अपनी पदोन्नति तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विशेष अधिवक्ता भी रहे, इसके अलावा 2012 से अगस्त 2013 तक उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता भी रहे, जब उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला- हम कूड़ा घर नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का स्थानांतरण इलाहाबाद हाईकोर्ट किए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। बार एसोसिएशन ने पत्र जारी कर कहा है कि हम कूड़ा घर नहीं हैं। बार ने कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि दिल्ली में न्यायमूर्ति के घर में लगी आग को बुझाने के दौरान लगभग 15 करोड़ रुपए मिले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति का स्थानांतरण इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया है। हाईकोर्ट बार ने पत्र जारी कर इसका कड़ा विरोध किया है।

भाजपा बोली- अदालती मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए
इस मामले पर भाजपा ने कहा कि पार्टी को अदालतों के मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए और सीजेआई पहले से ही इस मामले से अवगत हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने इस मामले पर निर्णय ले लिया है, जिससे उच्च न्यायपालिका पर लोगों की असहज नजर पड़ रही है। हालांकि, भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर एक पोस्ट में उल्लेख किया कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने लोकपाल के निर्देशानुसार शिबू सोरेन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच रोक दी है।

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