आग के बादल होते क्या हैं,जिनकी वजह से दहल रहे यूरोप के जंगल, ये कितने घातक

लवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए घातक साबित हो रहा है। पहले अमेरिका-कनाडा और अब यूरोप के कुछ देशों में जंगलों की आग ने आम जनजवीन को गहराई से प्रभावित किया है। आलम यह है कि दक्षिण-पश्चिम यूरोप में चार लाख से ज्यादा लोगों को खतरे वाली जगहों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जंगलों की इस आग से न सिर्फ बड़े हिस्से में संपत्तियों, बल्कि जानवरों और मवेशियों की जान जाने का बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले हफ्ते शुरू हुई इस जंगल की आग का भड़कना अब खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। वैज्ञानिकों ने इसकी वजह ‘आग के बादलों’ को बताया है, जिसे अंग्रेजी में ‘पायरोक्यूमुलोनिम्बस’ भी कहा जाता है। इनकी वजह से फ्रांस और स्पेन सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बताया जाता है कि पहले जलवायु परिवर्तन से जुड़ी यह घटना सिर्फ ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका में ही देखी जाती थी। हालांकि, अब यूरोप में इसका दिखना विशेषज्ञों के लिए डराने वाला है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह आग के बादल क्या होते हैं? इनका बनना इतना खतरनाक क्यों होता है? यह दुनिया में कितने आम हैं? एक के बाद एक देश में इनसे जुड़ी परिस्थितियां क्यों बनती जा रही हैं? आइये जानते हैं…

क्या होते हैं आग के बादल, जिनसे दहला यूरोप?

फायर क्लाउड एक बेहद खतरनाक और विशाल तूफानी बादल होते हैं, जो सीधे तौर पर भयंकर जंगल में लगी आग से ही पैदा होते हैं। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी- नासा ने इनकी भयावहता को देखते हुए इन्हें बादलों का आग उगलने वाला ड्रैगन का नाम दिया है।

आग के बादल बनना इतना खतरनाक क्यों?

आग के बादल का बनना धरती में लगी किसी भी आग को बेकाबू बनाने के साथ ज्यादा विनाशकारी भी बना देता है। इसकी चार बड़ी वजहें हैं…

और पढ़े  कई राज्यों में 11 सितंबर तक भारी बारिश का पूर्वानुमान,IMD का पूर्वानुमान क्या?

अपना खुद का मौसम तंत्र विकसित करना: जब ये विशाल बादल बनते हैं, तो वे आग के ऊपर अपना खुद का अप्रत्याशित मौसम तंत्र बना लेते हैं। इससे आग के रास्ते में आने वाली कोई भी चीज अपने आप सुलग या जल सकती है।

तेज और अप्रत्याशित हवाएं: ये बादल बहुत ही शक्तिशाली, अनियमित और तेजी से दिशा बदलने वाली हवाएं (अपड्राफ्ट और डाउनड्राफ्ट) पैदा करते हैं। ये तूफानी हवाएं नीचे लगी आग के लिए ऑक्सीजन और ईंधन का काम करती हैं, जिससे आग और तेजी से और हर दिशा में फैलने लगती है।

बिना बारिश के बिजली गिरना: एक सामान्य तूफानी बादल की तरह, ये आग के बादल भी बिजली पैदा कर सकते हैं, लेकिन इनमें नमी या बारिश नहीं के बराबर होती है। इनसे कड़कने वाली बिजली कई मील दूर तक गिर सकती है, जिससे दूर-दराज के इलाकों में आग के नए मोर्चे खुल जाते हैं।

दमकलकर्मियों के लिए आग बुझाने के मुश्किल हालात: इन बादलों की वजह से उड़ती चिंगारियों और तेज हवाओं के कारण आग का पैटर्न इतना अप्रत्याशित हो जाता है कि दमकलकर्मियों के लिए जमीन पर आग बुझाना बेहद खतरनाक और लगभग असंभव हो जाता है। स्थिति परिचालन असंभवता तक पहुंच जाती है। ऐसे में दमकलकर्मियों को आग बुझाने के बजाय रणनीतिक रूप से पीछे हटने और सिर्फ लोगों को बचाने की कोशिश ही करने को मजबूर होना पड़ता है।

दुनिया में कितना आम है आग के बादल दिखना? 

आग के बादल या पायरोक्यूमुलोनिम्बस मूल रूप से एक दुर्लभ मौसमी घटना माने जाते हैं। हालांकि, दुनिया के कुछ हिस्सों में इससे जुड़ी घटनाएं पहले देखी गई है, जबकि अन्य हिस्सों के लिए ये बिल्कुल नए और चिंताजनक हैं। ऐतिहासिक रूप से ये खतरनाक बादल मुख्य रूप से जंगल की आग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों, जैसे- ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका- कनाडा और कैलिफोर्निया में ही देखे गए हैं। ऑस्ट्रेलिया में इस सदी की शुरुआत से ही इन बादलों को देखा जा रहा है और कनाडा-ऑस्ट्रेलिया में ऐसी घटनाएं नियमित रूप से होती रहती हैं। 2022 में कैलिफोर्निया की भीषण आग के दौरान भी इनका निर्माण हुआ था।

और पढ़े  नेपाल जल प्रलय-: 65 स्कूल कल से खुलेंगे, बच्चों को सदमे से निकालने की कोशिश, देश में 13वें दिन शोक

कहां पहले नहीं देखे गए?

यूरोप और खासकर फ्रांस के लिए यह स्थिति पूरी तरह से अभूतपूर्व है। हाल ही में फ्रांस में जिस मात्रा में आग के बादल देखे गए हैं, अगर उसकी आधिकारिक पुष्टि हो जाती है, तो यह फ्रांस के इतिहास में पहली बार होगा जब जलवायु परिवर्तन अपने चरम पर होगा।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यह दुर्लभ घटना अब काफी आम होती जा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है, जो विश्व स्तर पर जंगल की आग के लिए ज्यादा खतरनाक परिस्थितियां पैदा कर रहा है और इसी के चलते इन आग के बादलों का निर्माण बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जलवायु मॉडलों के मुताबिक, भविष्य में इन बादलों के बनने की आवृत्ति और गंभीरता दोनों में और ज्यादा बढ़ोतरी होने की आशंका है।

यूरोप के कौन-कौन से क्षेत्रों में तबाही मचा रही जंगल की आग?

यूरोप में भयंकर जंगल की आग और उससे पैदा होने वाले आग के बादल मुख्य रूप से फ्रांस और स्पेन में भारी तबाही मचा रहे हैं। इन देशों के कई प्रमुख शहर, गांव और पर्यटन स्थल इस खतरे की चपेट में हैं।

1. फ्रांस

फ्रांस का दक्षिण-पश्चिमी हिस्सा इस भीषण आग से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।

बोर्डो और सौमोस: जंगलों की आग बोर्डो शहर के बेहद करीब पहुंच चुकी है और इसी इलाके में खासकर सौमोस गांव के ऊपर, एक भयानक आग के बादल को बनते हुए दर्ज किया गया।

गिरोंड क्षेत्र: इस इलाके में आग ने फ्रांस की राजधानी पेरिस के आकार से चार गुना बड़े क्षेत्र (लगभग 162 वर्ग मील) को जलाकर खाक कर दिया है।

और पढ़े  कर्नाटक के PWD मंत्री जरकीहोली के ठिकानों पर ईडी की रेड: सांसद बेटी के परिसर भी खंगाले, कार्रवाई की वजह क्या?

पर्यटन स्थल: आग के खतरे को देखते हुए अर्काचोन बे, कैप-फेरेट, और ले पोर्या जैसे लोकप्रिय हॉलिडे स्पॉट्स की तरफ जाने वाले मुख्य राजमार्गों को बंद कर दिया गया है और पर्यटकों को वहां जाने से मना किया गया है।

इसके अलावा बिस्कारोस, फॉनटेनब्लियू का जंगल, लैंडेस, टार्न, लैकेनाउ और वार सहित फ्रांस के कई अन्य इलाके भी आग की चपेट में हैं।

2. स्पेन

स्पेन में भी आग कई मोर्चों पर भड़की हुई है खासकर मैड्रिड के पश्चिम और पूर्वी तट के साथ वाले इलाकों में। इसके अलावा प्रमुख प्रभावित पर्यटन स्थलों में एविआ, टोलेडो, वैलेंसिया और कास्टेलोन जैसे मशहूर स्पेनिश पर्यटन स्थल इस आग से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

इनके अलावा कैस्टिला-ला मंचा, ग्वाडलजारा, नुलेस, रोबलेडो डी शावेला और विलामैंटा जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी आग का कहर जारी है।

3. अन्य यूरोपीय क्षेत्र

हालांकि ‘आग के बादलों’ का मुख्य कहर फ्रांस में है, लेकिन आग की छोटी घटनाओं ने यूरोप के कुछ अन्य हिस्सों को भी प्रभावित किया है, जिनमें इटली, पश्चिमी जर्मनी और इंग्लैंड शामिल हैं। यहां- आइल ऑफ व्हाइट में हेडन वॉरेन और पीक डिस्ट्रिक्ट का इलाका आग से प्रभावित हुआ है।

  • Related Posts

    ब्रिक्‍स सम्‍मेलन- बस कुछ ही देर में शुरू होगी शिखर सम्मलेन की बैठक, राष्ट्राध्यक्षों के पहुंचने का हो रहा इंतजार

    भारत की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज दोपहर दिल्ली गए हैं। जिनपिंग इस दौरे पर पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत…

    पता नहीं अपने आप को G7 क्यों कहते हैं?: पुतिन ने पश्चिमी देशों पर कसा तंज, समझाया ब्रिक्स कैसे बना ताकतवर