पश्चिम एशिया संघर्ष- हंदाला का सऊदी पर साइबर अटैक, ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी की कड़ी आलोचना की

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श्चिम एशिया में करीब दो महीने से अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष जारी है। अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति के बाद वार्ता की जो विफल रही।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नाकाबंदी की आलोचना की

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका की ओर से लगाए गए समुद्री नाकाबंदी (ब्लॉकेड) की कड़ी आलोचना की है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या एक गैरकानूनी युद्ध को दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर जीता जा सकता है? उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि क्या खुद को नुकसान पहुंचाकर किसी और को सबक सिखाना सही है?

 

फलस्तीन समर्थक हैकर समूह का सऊदी की इंडस्ट्री पर साइबर हमला

फलस्तीन समर्थक हैकर समूह हंदाला ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब की औद्योगिक (इंडस्ट्रियल) संरचनाओं पर बड़े साइबर हमले शुरू किए हैं। समूह का कहना है कि यह हमला एक तरह की चेतावनी और रोकथाम के तौर पर किया जा रहा है। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य सऊदी अरब की महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रणालियों को निशाना बनाना है।

अमेरिका के समुद्री नाकेबंदी के समर्थन में इस्राइल

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर नेवल ब्लॉकेड (समुद्री नाकाबंदी) के फैसले का समर्थन करता है। नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा कि ईरान ने नियमों का उल्लंघन किया है, इसलिए ट्रंप ने यह सख्त कदम उठाया। उन्होंने कहा कि इस्राइल इस फैसले के साथ पूरी तरह खड़ा है और इस मामले में अमेरिका के साथ लगातार संपर्क और समन्वय में है।

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इस्राइल तुर्किये को नया दुश्मन बना सकता है- तुर्की विदेश मंत्री

तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस्राइल भविष्य में तुर्किये को नया दुश्मन घोषित कर सकता है। उनका कहना है कि इस्राइल अपनी राजनीति को बनाए रखने के लिए हमेशा किसी न किसी दुश्मन की तलाश में रहता है। फिदान ने यह भी बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई बातचीत में भले ही कोई समझौता नहीं हो पाया, लेकिन दोनों पक्ष युद्धविराम को लेकर ईमानदार नजर आते हैं। यह बातचीत पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई थी।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर परमाणु मुद्दे पर सब कुछ या कुछ नहीं जैसी स्थिति बनती है, खासकर यूरेनियम संवर्धन को लेकर, तो आगे गंभीर बाधाएं आ सकती हैं। इस बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस्राइल और तुर्किये के रिश्ते बिगड़ते हैं, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा पर पड़ सकता है।


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