गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय- गौतमबुद्ध विवि के कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी बर्खास्त, योग्यता पूरी न करने पर की गई कार्रवाई

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निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक एवं प्रशासनिक योग्यता पूर्ण न करने के कारण गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी की सेवा समाप्त कर दी गई है। प्रभारी कुलसचिव प्रो. चंद्र कुमार सिंह ने बताया कि डॉ. त्रिपाठी ने पद के लिए आवश्यक न्यूनतम योग्यता धारण न करने के बावजूद आवेदन प्रस्तुत किया था।

 

दस्तावेज परीक्षण समिति ने जांच के दौरान पाया कि उन्होंने अपने अनुभव से संबंधित तथ्यों को भ्रामक एवं अपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय के प्रबंध बोर्ड ने अभिलेखों के परीक्षण करने के उपरांत और डॉ. त्रिपाठी को व्यक्तिगत रूप से सुनने के पश्चात, यह पाया कि उनकी नियुक्ति विधि विरुद्ध है। तथ्यों के आधार पर तत्काल प्रभाव से उनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

यह आदेश 24 मार्च को जारी किया गया था, हालांकि इसकी जानकारी बाहर नहीं आई थी। वहीं, डॉ. विश्वास त्रिपाठी का कहना है कि पद के लिए पूरी योग्यता रखते हैं। उनकी ओर से उच्च न्यायालय में कुलपति के खिलाफ दायर की गई अवमानना की रिट के कारण द्वेष पूर्ण कार्रवाई की गई है। इस पर वह उच्च न्यायालय में आपत्ति दाखिल करेंगे। उनके खिलाफ वित्त में हेराफेरी का मामला भी द्वेषपूर्ण ढंग से दर्ज कराया गया है।

कैश में लेते थे फीस, विवि के खातों में नहीं होती थी जमा
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में फीस घोटाले के आरोपों के बाद लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर बोर्ड को भी फीस को लेकर कई शिकायतें मिली थी। छात्रों ने शिकायत की थी कि कैश में फीस लेने के बाद उन्हें विवि की मोहर लगी जाली रसीद दी गई। कुछ बाहरी लोग व विवि के सीनियर छात्र जूनियरों को फीस कम कराने का झांसा देकर उनसे कैश में पैसे ले लेते थे। उसके बाद वह पैसा विवि के खातों में जमा नहीं किया जाता था।

फीस जमा नहीं होने पर परीक्षा देने से रोकने पर छात्रों को ठगी का पता चलता था।   प्रॉक्टर बोर्ड के पास जब शिकायतें पहुंचीं तो मामले का खुलासा हुआ। कुछ छात्रों को संस्पेड भी किया गया। वहीं, बाहरी लोगों को जेल भेजा गया। एक छात्र ने बताया कि ठगी में फंसकर उसे दोबारा फीस जमा करनी पड़ी। एक छात्रा ने बताया कि 16 हजार रुपये जमा किए, लेकिन कहा गया कि फीस नहीं जमा है। वह परीक्षा में नहीं बैठ सकती है। उन्होंने बताया कि हर विभाग के 200 से 400 छात्रों के साथ ठगी हुई।

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क्या करता है प्रॉक्टर बोर्ड
विवि में प्रॉक्टर बोर्ड का मुख्य काम शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन बनाए रखना, नियमों का पालन सुनिश्चित करना और छात्रों के आचरण की निगरानी करना है। दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी यह सिफारिश करता है। इसके साथ ही छात्रों की शिकायतों की जांच भी करता है।


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