होर्मुज: ‘खाड़ी से ओमान तक कोई बंदरगाह नहीं रहेगा सुरक्षित’, अमेरिका की नाकेबंदी वाली धमकी पर ईरान का पलटवार

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रान-अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी का एलान कर दिया है। इसके जवाब में ईरान ने सख्त चेतावनी दी। ईरान की सेना ने कहा है कि अगर उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया तो फारस की खाड़ी से लेकर ओमान सागर तक कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

 

अमेरिका ने साफ किया है कि वह तय समय से ईरान के सभी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों को रोकने की कार्रवाई शुरू करेगा। यह फैसला उस समय लिया गया है जब दोनों देशों के बीच पाकिस्तान में हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अमेरिका का कहना है कि यह कदम ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उठाया गया है। वहीं, ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया और कहा कि ये तो समुद्री डकैती के बराबर है।

ईरान ने क्या पलटवार किया?
ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड ने साफ कहा है कि समुद्री सुरक्षा सभी के लिए समान होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के बंदरगाहों को खतरा हुआ तो पूरे क्षेत्र में किसी भी देश का बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि किसी भी सैन्य जहाज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

अमेरिका की नाकेबंदी के मायने
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी। जो ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश या वहां से बाहर निकलेंगे। हालांकि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच जाने वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इसके बावजूद इस कदम से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।

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क्या बातचीत असफल होने से बिगड़े हालात?
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में पाकिस्तान में हुई उच्चस्तरीय बातचीत बेनतीजा रही। अमेरिका ने कहा कि ईरान ने उसकी शर्तें नहीं मानीं, जबकि ईरान ने इस्राइल और अमेरिका के हमलों से हुए नुकसान की भरपाई और अपनी जमी संपत्तियों की रिहाई की मांग रखी थी। इस विफलता के बाद ही नाकेबंदी का फैसला लिया गया।

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और उसके पास जवाब देने के कई विकल्प हैं। वहीं अमेरिका इस कदम से ईरान पर और दबाव बनाना चाहता है। 22 अप्रैल तक लागू संघर्षविराम के बाद हालात और बिगड़ सकते हैं। इससे बड़े टकराव की आशंका बढ़ गई है।


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