इबोला – डब्ल्यूएचओ की सोच से भी तेज फैल रहा है इबोला का प्रकोप, जानिए इसके खतरनाक कोरोना कनेक्शन

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वैश्विक स्वास्थ्य के लिए इन दिनों इबोला सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। अफ्रीकी देश यूगांडा और कांगो, फिलहाल इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों में कुल मिलाकर 1,198 मामले (128 पुष्ट और 1,077 संदिग्ध) सामने आए हैं। इसके अलावा करीब 228 संदिग्ध मौतें भी दर्ज की गई हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि इबोला अब अन्य देशों में भी चिंताएं बढ़ाने लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोपीय देश भी अब वायरस की चपेट में आते दिख रहे हैं।
 

  • उत्तरी इटली में युगांडा से लौटे दो संदिग्ध मामले सामने आए, हालांकि बाद में दोनों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई।
  • ऑस्ट्रिया में भी एक संदिग्ध मरीज को अस्पताल में क्वारंटाइन में रखा गया है।
  • इससे पहले हमने भारत में भी दो संदिग्ध मामलों की जानकारी दी थी, जिसमें एक की रिपोर्ट निगेटिव है और दूसरे की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि इबोला का मौजूदा प्रकोप इतनी तेजी से फैल रहा है कि इसे काबू करना मुश्किल हो रहा है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य संकट के और गहराने की आशंका बढ़ गई है।

 

इबोला का कोराना कनेक्शन- शव दफनाते समय हो रहा संक्रमण

अफ्रीकी देशों से इतर इस महीने की शुरुआत में पहले ही एक अमेरिकी डॉक्टर में इबोला संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। डॉक्टर इबोला प्रभावित क्षेत्र में  कुछ समय तक काम करने के बाद लौटा था।

  • संक्रमण के प्रसार और जोखिमों को देखते हुए अमेरिका, भारत सहित कई देशों ने हवाई अड्डों पर  यात्रियों की जांच बढ़ा दी है।
  • हालिया प्रकोप में मारे गए 220 लोगों में तीन रेड क्रॉस स्वयंसेवक भी शामिल हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि संक्रमित शवों को संभालते समय वे इस वायरस की चपेट में आ गए थे।
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कांगों में भी संक्रमण के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां इबोला से मारे गए दोस्तों और परिवार के सदस्यों के शवों को दफनाने के दौरान लोग संक्रमित हुए हैं।
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हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं, ये स्थितियां इबोला को और भी खतरनाक बना देती हैं। वैसे तो इबोला के कारण फिलहाल कोविड जैसे हालात नहीं हैं फिर भी शवों को दफनाने के दौरान संक्रमण जैसी कुछ स्थितियां कोरोना के दिनों की याद दिला रही हैं।

 

 

2014 के बाद सबसे खतरनाक प्रकोप- डब्ल्यूएचओ भी चिंतित

ऐसा नहीं है कि कोविड-19 जैसा, इबोला का ये कोई पहला प्रकोप है। इस महामारी को पहले ही ‘वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया जा चुका है।

  • इससे पहले 2014 में भी स्थिति काफी बिगड़ी थी।
  • मौजूदा महामारी 2014 में फैले प्रकोप के बाद सबसे तेजी से फैलने वाली महामारियों में से एक है।
  • 2014 के उस प्रकोप के कारण पूरे पश्चिमी अफ्रीका में 28,000 से अधिक मामले सामने आए थे और 11 हजार लोगों की मौत हुई थी।
  • 2014 के प्रकोप के दौरान पहली बार भारत में भी एक संदिग्ध की पहचान की गई थी, हालांकि बाद में वह ठीक हो गया था।

मौजूदा प्रकोप को लेकर डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने चेतावनी दी है-

 

इस महामारी से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयास, इसके फैलने की गति के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। हम अपने अभियानों का विस्तार तेजी से कर रहे हैं, लेकिन इस समय यह महामारी हमसे कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है। डॉ. घेब्रेयेसस ने अफ्रीकी संघ को दिए अपने हालिया संबोधन में अन्य देशों को चेतावनी दी कि इस वायरस को और फैलने से रोकने के लिए उन्हें तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।”

 

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कोरोना महामारी की शुरुआत जैसे हालात

विशेषज्ञ  चेतावनी दे रहे हैं इस समय जो स्ट्रेन (बुंडिबुग्यो स्ट्रेन) इस बीमारी को फैला रहा है, उससे बचाने के लिए कोई वैक्सीन मौजूद नहीं है। इसलिए चिंता की बात ये है कि ये निश्चित रूप से फैलता रहेगा और लोगों की जान के लिए भी खतरा बना रहेगा।

  • कोरोना महामारी की शुरुआत में भी कुछ ऐसे ही हालात थे। नोवेल कोरोना वायरस (सार्स-सीओवी-2) से बचने के लिए भी कोई वैक्सीन नहीं था लिहाजा संक्रमण ने देखते ही देखते पूरी दुनिया को चपेट में ले लिया था।
  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वे जिस वैक्सीन पर काम कर रहे हैं, उसे इंसानों पर टेस्ट करने में अभी दो से तीन महीने का समय लगेगा।
  • इसका मतलब है कि इस बात की संभावना कम ही है कि अफ्रीका के मरीजो को अगले छह महीनों के भीतर यह दवा मिल पाएगी।
  • एक सफल वैक्सीन मरीजों को गंभीर बीमारी और मौत से बचाने के साथ-साथ वायरस के फैलाव को भी सीमित कर सकती है, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि यह असरदार होगी।
  • रूस ने दावा किया है कि उसने भी वैक्सीन तैयार कर ली है पर उसे कब तक प्रमाणिकता मिलेगी, इसको लेकर भी बड़ा सवाल है।

 

 

सिर्फ अफ्रीका नहीं, पूरी दुनिया को खतरा

इबोला और कोविड का एक और संभावित कनेक्शन इसके शुरुआती लक्षण भी हैं। बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लक्षणों में शुरुआत में फ्लू जैसा बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और दस्त होते हैं।

  • गंभीर स्थितियों में ये आंतरिक रक्तस्राव और ऑर्गन फेलियर का भी कारण बन सकता है।
  • मरीजों में लक्षण दिखने शुरू होने से 21 दिनों पहले से ही शरीर में वायरस हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय उनसे दूसरों को भी संक्रमण का खतरा रहता है।
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सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ डॉ. डेरेक स्लोन कहते हैं,  हालिया प्रकोप से पता चलता है कि हमें बेहद ‘सतर्क’ रहना चाहिए।हमारी आपस में जुड़ी हुई दुनिया में इस तरह के संक्रामक रोगों के प्रकोप को किसी और देश की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे सिर्फ अफ्रीका ही नहीं, पूरी दुनिया को खतरा है।


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