पश्चिम एशिया संघर्ष- ईरान में 7वें दिन भी अमेरिकी हमले जारी, तेहरान की चेतावनी-अब आर-पार की होगी लड़ाई

रान में सातवें दिन भी अमेरिकी हमले जारी हैं। अमेरिकी सेना ने कार्रवाई और हवाई हमलों के दौरान ईरान में पुलों और पानी के प्लांट पर बम बरसाए हैं। अमेरिकी सेना की कार्रवाई होर्मुज में गतिरोध को लेकर ट्रंप की धमकी के बाद हो रही है।

 

 

बहरीन में फिर गूंजे हवाई हमले के सायरन, लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के बीच बहरीन में कुछ ही घंटों के भीतर दूसरी बार हवाई हमले के सायरन गूंज उठे हैं। सायरन की आवाज सुनते ही प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी किया है। बहरीन के गृह मंत्रालय ने नागरिकों और प्रवासियों से शांत रहने और तुरंत नजदीकी सुरक्षित बंकरों या आश्रयों में जाने की अपील की है। सूत्रों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर दागे जा रहे ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण यह आपातकालीन सायरन बजाए गए हैं। स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन लगातार हालात पर नजर रख रहा है।

ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी; हमले न रुके तो शुरू करेंगे ‘महा-आक्रामक अभियान’

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कई ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। अमेरिका ने लगातार सातवीं रात ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना का कहना है कि वे ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर कर रहे हैं। दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका पर अपने हवाई अड्डे और पुलों जैसे नागरिक ठिकानों को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं। ईरान के सैन्य सलाहकार ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका के हमले नहीं रुके, तो वे बहुत बड़ा आक्रामक अभियान शुरू कर देंगे। इस भारी गोलाबारी के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा गहरा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि हमले नहीं रुके तो हम आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं।

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पश्चिम एशिया: टकराव बढ़ने पर आस-पास के देशों का हाल क्या?

ओमान की खाड़ी पर स्थित ईरान के चाबहार बंदरगाह पर एक टावर ढह गया। ये पड़ोसी देश अफगानिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग है। चाबहार बंदरगाह को ईरान भारत के समर्थन से चला रहा था। अंतरिम युद्धविराम के बाद शुरू हुए टकराव के दौरान अमेरिकी हवाई हमलों में इस बंदरगाह को भी कई बार निशाना बनाया गया है। ईरान में हमले से ध्वस्त हुए टावर के संबंध में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि इस केंद्र का इस्तेमाल ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के अधिकारी करते हैं। इस टावर की मदद से वाणिज्यिक जहाजों को ‘ट्रैक कर निशाना बनाया’ जाता था। अमेरिका ने इसे ईरान के समुद्री निगरानी नेटवर्क का हिस्सा बताया है।

  • ईरान ने युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की।
  • कतर ने दो बार जनता को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की चेतावनी दी।
  • ईरान ने बहरीन और कुवैत को भी निशाना बनाया है।
  • जॉर्डन की सेना ने कहा, शुक्रवार को ईरान की तरफ से  दागी गई तीन मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया।
  • उत्तरी इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्द क्षेत्र के इरबिल और सुलेमानिया में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हमले में नौ लोग मारे गए, कई अन्य घायल हुए।

ईरान में पुलों और बिजली आपूर्ति अवसंरचना को कितना नुकसान?

अमेरिका की तरफ से किए गए हमलों की जानकारी ईरान की सरकारी टेलीविजन पर दी गई। इसके अनुसार, शुक्रवार को ईरान के दक्षिणी प्रांत होर्मोजगान में अमेरिकी हवाई हमलों में पुलों को निशाना बनाया गया। ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्थित ईरान के तटीय शहर बंदर खमीर को निशाना बनाकर किए गए। ईरान के मुताबिक राजमार्ग और रेलवे पुलों पर किए गए अमेरिकी हमले ईरान के मुख्य बंदरगाह बंदर अब्बास और तेहरान के बीच सड़क संपर्क काटने के मकसद से किए गए लगते हैं। तेहरान ने स्वीकार किया है कि अमेरिकी हवाई हमले के दौरान ‘बिजली के बुनियादी ढांचे’ को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, किन क्षेत्रों को निशाना बनाया गया ये जानकारी सामने नहीं आई है। ऊर्जा मंत्रालय ने दक्षिणी प्रांतों में रहने वाले लोगों से कम बिजली का उपयोग करने की अपील की है।

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जंग की आग के कारण तेल की कीमतों में उछाल

गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच चार महीने से अधिक समय से युद्ध चल रहा है। इसी साल 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी हमले का माकूल जवाब दिया जा रहा है। अमेरिकी सेना ने भी सैन्य कर्मियों के घायल होने की पुष्टि की है। दोनों देशों का संघर्ष बढ़ने के बाद तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। शुक्रवार को तेल की कीमत 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। ये दर बीते लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब है। तनाव और बमबारी के बीच होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गई है।

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