Weather: हिमाचल के कई भागों में चार दिन भारी बारिश का अलर्ट, राज्य में 150 से अधिक सड़कें बाधित

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हिमाचल प्रदेश के कई भागों में चार दिन भारी बारिश का येलो-ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं मंडी आपदा के बाद से राज्य में अभी भी 150 से अधिक सड़कें बाधित हैं। सबसे ज्यादा सड़कें मंडी जिले में प्रभावित हैं। इसके अलावा कई बिजली ट्रांसफार्मर व जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हैं।  बीते 24 घंटों के दाैरान जटोन बैराज में 33.2, पालमपुर 33.0, मंडी 26.4,बीबीएमबी 24.0, कांगड़ा 21.2, पांवटा साहिब 20.8, कोठी 18.6, बिलासपुर 15.4, गुलेर 14.4, नारकंडा 13.5, कुफरी 13.0 व भरमौर में 7.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

 

इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 26 जुलाई को कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना है। 27, 30, 31 जुलाई और 1 अगस्त को कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। 28 और 29 जुलाई को अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान है। 29 जुलाई को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू व मंडी जिले के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 27, 28 व 30 जुलाई के लिए कई भागों में येलो अलर्ट है।  अगले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में कोई बड़ी वृद्धि होने की संभावना नहीं है। इसके बाद अगले 3-4 दिनों में अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। अगले 4-5 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।

 

मानसून में 25 जुलाई तक 153 लोगों ने गंवाई जान
प्रदेश में इस मानसून सीजन में 20 जून से 25 जुलाई तक 153 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 252 लोग घायल हुए हैं। 34 लोग अभी भी लापता हैं। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ से अब तक 1,588 कच्चे-पक्के घरों, दुकानों को क्षति हुई है। 1,139 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,376 पालतु पशुओं की मौत हो गई है। नुकसान का कुल आंकड़ा 1436 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

और पढ़े  Himachal- मानसून में 798 करोड़ के करीब नुकसान, 145 सड़कें बंद, 224 ट्रांसफार्मर और 14 पेयजल योजनाएं ठप

पहाड़ी दरकने से 60 लोग घर छोड़ने के लिए हुए मजबूर
शुक्रवार को कुल्लू के सैंज में पहाड़ी दरकने से 14 परिवारों के 60 लोगों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। दोपहर में सैंज घाटी की देहुरीधार पंचायत के दरमेढा गांव के पीछे की पहाड़ी से भूस्खलन हुआ। भारी भरकम चट्टानें, पत्थर और मलबा गिरने से गांव के लोग जान बचाकर सुरक्षित जगह की तरफ भागे।


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