लगातार बिजली संकट से जूझ रहे उत्तराखंड को 1471 मेगावाट की छह नई बिजली परियोजनाओं से बड़ी राहत मिलेगी। नए साल से यूजेवीएनएल की ये परियोजनाएं धरातल पर उतरने लगेंगी। इसमें पहली बार चीला पावर हाउस पर 90 मेगावाट का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी शामिल है।
लखवाड़-व्यासी से 420 मेगावाट बिजली उत्तराखंड को मिलेगी
लगातार बढ़ रही मांग के बीच जहां 1320 मेगावाट का कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्र कारगर होने वाला है, जिससे वर्ष 2030-31 से मिलने की उम्मीद है। इसके लिए नियामक आयोग से मंजूरी मिलने के बाद अदानी पावर को जिम्मेदारी दी है। वहीं, राज्य में बन रही किशाऊ परियोजना से 211 मेगावाट बिजली मिलेगी जबकि लखवाड़-व्यासी से 420 मेगावाट बिजली उत्तराखंड को मिलेगी। व्यासी की 120 मेगावाट मिलनी शुरू हो चुकी है।
इन सबके बीच यूजेवीएनएल ने छह ऐसी परियोजनाओं को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है, जिनसे राज्य को 1471 मेगावाट बिजली का लाभ होगा। यानी आने वाले समय में सही मायनों में बिजली की मांग के सापेक्ष पूरी या अधिक उपलब्धता हो सकेगी।
कौन सी परियोजना किस चरण में
| परियोजना का नाम | क्षमता मेगावाट में | वर्तमान स्थिति |
| त्यूनी-प्लासू | 80 | टेंडर जारी। |
| आराकोट-त्यूनी | 81 | डीपीआर अप्रूव्ड |
| इच्छाड़ी पंप स्टोरेज प्लांट | 600 | डीपीआर तैयार, |
| सौंग पंप स्टोरेज प्लांट | 500 | काम जारी। |
| सेला उर्थिंग हाइड्रो प्रोजेक्ट | 120 | डीपीआर बन रही |
| चीला बीईएसएस | 90 | टेंडर जारी। |
बीईएसएस समेत पांच अन्य परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। आने वाले समय में धरातल पर इनका काम नजर आएगा। हमारा मकसद है कि आगामी पांच से सात साल के भीतर राज्य में पर्याप्त बिजली उपलब्धता होगी। -एके सिंह, एमडी, यूजेवीएनएल








