उत्तराखंड: प्रदेश में मदरसों की वास्तविक संख्या पर उठ रहे हैं सवाल, 452 में से अब तक 33 को ही मिली मान्यता

त्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था बदलने के साथ अब सबसे बड़ा सवाल मदरसों की वास्तविक संख्या को लेकर खड़ा हो गया है। मदरसा बोर्ड ने 452 मदरसों की सूची जारी की थी, जबकि शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में इतने मदरसे नहीं हैं। विभाग को केवल उन मदरसों की जानकारी है, जिसे मिड डे मील दिया जा रहा था।

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को मदरसों की जो सूची दी। उसमें हरिद्वार जिले में तहतानिया, फौकानियां, मुंशी-मौलवी एवं आलिम, अरबी-फारसी की मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या 270 दिखाई गई, लेकिन शिक्षा विभाग का कहना है कि इस जिले में मिड डे मील केवल 131 मदरसों को दिया जा रहा था। अन्य मदरसों का विभाग के पास रिकाॅर्ड नहीं है।

यही हाल कुछ अन्य जिलों का है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बाकी मदरसे कहां गए ? क्या मदरसे बंद हो चुके हैं ? या फिर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज मदरसों की वास्तविक स्थिति कभी जमीन पर जांची ही नहीं गई ? हालांकि विभागीय मंत्री खजानदास का कहना है कि कुछ मदरसे एक कमरे में चल रहे थे। जो अब बंद हो चुके हैं।
बोर्ड खत्म हुआ तो सामने आया रिकॉर्ड का अंतर
मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद अब सभी संबंधित संस्थानों को नई व्यवस्था के तहत मान्यता हासिल करनी है, नियमानुसार पूर्व में मान्यता प्राप्त मदरसों को भी नए शैक्षिक सत्र में धार्मिक शिक्षा संचालित करने के लिए प्राधिकरण से मान्यता लेनी है, लेकिन मान्यता तो दूर मदरसों की संख्या को लेकर भी शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में अंतर है। वहीं, 452 में से अब तक 33 मदरसों को ही मान्यता मिली है।

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मान्यता के लिए आगे नहीं आ रहे मदरसे
अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता को लेकर नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी बड़ी संख्या में मदरसों के मान्यता प्रक्रिया में आगे नहीं आने की बात सामने आई है। हरिद्वार में ही बड़ी संख्या में मदरसे संचालित होने का दावा किया गया, लेकिन शुरुआती दौर में अपेक्षाकृत कम संस्थानों ने मान्यता के लिए आवेदन किया। यही हाल देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले का है।

मदरसा बोर्ड के मुताबिक राज्य में 452 मदरसे हैं, शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में इनकी संख्या कम है। विभाग का कहना है कि जिन मदरसों को मिड डे मील दिया जा रहा था, उसके पास केवल उसकी जानकारी है। मदरसों की वास्तविक संख्या को लेकर प्रकरण की जांच करवाई जाएगी।
– डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, अध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

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