उत्तराखंड- पेपर लीक केस: चालाक सुरेंद्र ने फर्जीवाड़ा तो किया मगर भूल गया कि अब यूए नहीं यूके है उत्तराखंड

 

सुरेंद्र ने चालाकी से तीन फॉर्म भरे। हर हद तक फर्जीवाड़ा किया मगर इस चालाकी में वह एक भूल भी कर गया। वह अपने पैंतरों में इस कदर उलझ गया कि अब उत्तराखंड यूए नहीं बल्कि यूके हो गया है। जी हां, यह तथ्य सामने आया है सेवायोजन की ओर से दी जाने वाली इम्प्लाई आईडी में। उसने आईडी की शुरुआत यूए से की। जबकि, आईडी की शुरुआत यूके यानी उत्तराखंड के नाम से शुरू होती है। इसमें 16 अंक होते हैं मगर उसने यूए के आगे सिर्फ 13 ही अंक लिखे। इसी तरह उसने ऐसे कई फर्जीवाड़े किए जिसमें उसकी हर चालाकी पकड़ में आ गई।

उसने अपने पिता को एक बार सालीक, दूसरी बार शालीक तो तीसरी बार सलीक लिखा। फर्जी स्थायी प्रमाणपत्र बनवाया तो उस पर देहरादून का पता भी दर्शा दिया। जांच में सुरेंद्र कुमार के फर्जीवाड़े की एक-एक कर परतें खुली हैं। उसने अंग्रेजी में अपने पिता के नाम की स्पेलिंग को तीनों फॉर्म में अलग-अलग लिखा। ताकि, फॉर्म कंप्यूटर में स्वीकार हो जाए। उसने देहरादून के पते का एक स्थायी प्रमाणपत्र बनाया। इसके आधार पर ओबीसी का प्रमाणपत्र भी बनाया। इस पर यूके के साथ आगे 17 अंक लिखे गए हैं। जबकि, इसके प्रमाणपत्र संख्या में 16 अंक होते हैं। इसी तरह उसने जन्मतिथियों को भी अलग-अलग दर्शाने के लिए कई-कई बार हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और फिर ग्रेजुएट दर्शाया है।

अजब : 22 साल बाद मिला स्थायी प्रमाणपत्र

सुरेंद्र ने खुद को देहरादून के बालावाला निवासी बताते हुए एक स्थायी प्रमाणपत्र फॉर्म में लगाया है। इसमें उसने दर्शाया कि स्थायी प्रमाणपत्र के लिए उसने आवेदन 2001 में किया था। जबकि, यह जारी वर्ष 2023 में किया गया। यहीं वह एक और अजब खेल कर गया। प्रमाणपत्र पर शासनादेश की संख्या तो गलत लिखी ही साथ ही साथ नीचे एसडीएम के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। इस तरह उसका यह फर्जीवाड़ा भी पकड़ लिया। एक पता उसने हापुड़ जिले का भी दर्शाया। एक ही अभ्यर्थी कभी देहरादून तो कभी गाजियाबाद तो एक बार हापुड़ का।

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गजब : तीन साल में तीन विश्वविद्यालयों से स्नातक

आरोपी ने अपनी जन्मतिथि को अलग-अलग दर्शाने के लिए हाईस्कूल की परीक्षा को तीन बार देना दर्शाया। इसमें उसने एक बार 1995 और दूसरी बार 1988 जन्मतिथि दर्शायी। इसी तरह कई शिक्षण संस्थानों से इंटरमीडिएट होना भी दर्शाया। गजब तो तब हुआ जब उसने वर्ष 2010 से 2013 तक के ग्रेजुएशन के दस्तावेज प्रस्तुत किए। ये तीनों ग्रेजुएशन एक ही अवधि में तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों से करना दर्शाया। जबकि, ऐसा असंभव है।

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