गुरुवार को माइक्रोसॉफ्ट ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी। कंपनी को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया गया था। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्या नडेला को नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन से सम्मानित किया।
अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने माइक्रोसॉफ्ट को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की। एडोब और कई बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को भी निलंबित किया गया। उन्होंने कई सक्रिय संघीय जांचों का हवाला दिया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर अमेरिकी श्रमिकों को निकालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने 6,000 अमेरिकी श्रमिकों को निकाला, जबकि 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड का लाभ उठाया।
अन्य कंपनियों और विश्वविद्यालयों पर क्या कार्रवाई हुई?
सोंडरलिंग ने कहा कि श्रम विभाग इन कंपनियों के नए या लंबित आवेदन स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि इन कंपनियों ने 2009 से करीब 30 लाख विदेशी श्रमिकों का अनुरोध किया था। उन्हें 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा और 1 लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले थे। श्रम विभाग ने नौ प्रमुख अमेरिकी विश्वविद्यालयों में जे-1 वीजा धोखाधड़ी की ऐतिहासिक जांच की भी घोषणा की। गृह सुरक्षा विभाग ने F-1 छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) आवेदनों पर 70,000 रुपये और बाद के आवेदनों पर 30,000 रुपये के नए शुल्क का प्रस्ताव दिया है।






