ऋषिकेश योग नगरी रेलवे स्टेशन के समीप खांड गांव क्षेत्र में सोमवार रात उज्जैनी एक्सप्रेस के तीन डिब्बों के पटरी से उतरने की घटना ने रेलवे व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत की बात यह रही कि ट्रेन में यात्री मौजूद नहीं थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मियों के बीच चर्चा का विषय सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि उसके पीछे की परिस्थितियां बन गई हैं।
घटना के बाद सबसे अधिक चर्चा लोको पायलट की मौजूदगी को लेकर रही। हादसे के वक्त इंजन में चालक मौजूद था या नहीं, इसको लेकर रेलवे की ओर से देर रात तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाए कि हादसे के करीब ढाई घंटे तक सिर्फ जीआरपी और निचले स्तर के कर्मचारी ही हालात संभालते नजर आए।
इससे रेलवे की आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था पर भी सवाल उठे। हादसे की खबर फैलते ही आसपास से बड़ी संख्या में लोग रेलवे ट्रैक की ओर पहुंच गए। कई लोग मोबाइल फोन से वीडियो बनाते नजर आए, जबकि जीआरपी जवान लगातार भीड़ को ट्रैक से हटाने में जुटे रहे। फिलहाल पटरी से उतरे डिब्बों को हटाने और ट्रैक को सामान्य करने का काम जारी है, लेकिन यह घटना रेलवे सुरक्षा और संचालन प्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ गई है।

योग नगरी रेलवे स्टेशन के समीप खांड गांव क्षेत्र में सोमवार रात हुए तेज धमाके की आवाज ने पूरे इलाके को दहला दिया। रात करीब साढ़े नौ बजे आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। कुछ ही देर में लोगों को पता चला कि उज्जैनी एक्सप्रेस के डिब्बे पटरी से उतर गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार धमाका इतना तेज था कि कई घरों में लोग घबरा गए। पहले लोगों को लगा कि कहीं पहाड़ी क्षेत्र में ब्लास्टिंग या कोई बड़ा हादसा हुआ है, लेकिन रेलवे ट्रैक की ओर हलचल बढ़ने पर लोग दौड़ पड़े।









