नैनीताल- मॉल रोड को बचाने में 30 लीटर तेल ने बिगाड़ा सारा खेल

 

 पर्यटकों की पहली पसंद मॉल रोड के अस्तित्व को बचाने के बीच नया संकट खड़ा हो गया है। लोअर मॉलरोड को झील में समाने से बचाने के लिए चल रहा ट्रीटमेंट कार्य डीजल की भारी किल्लत के कारण ठप होने के कगार पर है। 250 लीटर डीजल की जरूरत के सापेक्ष केवल 30 लीटर ईंधन मिल पा रहा है।

 

अगस्त वर्ष 2018 में मॉल रोड का बड़ा हिस्सा ढहने के बाद से ही इसके स्थायी समाधान की मांग हो रही थी। लंबे इंतजार और तमाम चुनौतियों के बाद प्रशासन ने ओडीईएक्स तकनीक से माइक्रो-पाइलिंग का काम शुरू कराया। इस तकनीक में बड़ी ड्रिलिंग मशीनें और केसिंग यूनिट्स लगातार काम करती हैं जिनमें ईंधन की खपत ज्यादा होती है। पिछले कुछ दिनों से शहर के पेट्रोल पंपों पर सप्लाई कम होने के कारण निर्माण कार्य में लगी मशीनों को पर्याप्त तेल नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए 22 जून 2026 की समयसीमा तय की है। मानसून सिर पर है और झील का जलस्तर बढ़ने से पहले पाइलिंग का काम पूरा करना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है। यदि डीजल संकट जल्द दूर नहीं हुआ तो काम लटकने के साथ अधूरे छोड़े गए ड्रिल होल और खुली दरारें आने वाली बारिश में पूरे पहाड़ के लिए खतरा बन सकती हैं।

250 लीटर की जरूरत के मुकाबले महज 12 प्रतिशत यानी 30 लीटर डीजल ही मिल रहा है। इससे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जल्द इस संबंध में जिला प्रशासन से वार्ता की जाएगी। डीजल उपलब्ध नहीं हुआ तो मॉल रोड के बचाव का कार्य रोकना पड़ सकता है।

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